आई-पैक मामले पर गरमाई राजनीति, हर्षवर्धन शृंगला बोले-ममता बनर्जी ने लोकतंत्र को खतरे में डाला

दार्जिलिंग, 22 अप्रैल . राज्यसभा सदस्य हर्षवर्धन शृंगला ने पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला किया है. उन्‍होंने आई-पैक मामले को लेकर Supreme Court की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने कहा है कि सीएम ममता बनर्जी ने लोकतंत्र को खतरे में डाला है.

सांसद ने यह भी कहा कि यह मुद्दा जनता के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब उत्तर बंगाल में मतदान होने वाला है. उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे उन तथ्यों को ध्यान में रखें, जहां Government पर कानून और नियमों का पालन न करने के आरोप लग रहे हैं.

हर्षवर्धन शृंगला ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि आई-पैक मामले को लेकर Supreme Court की टिप्पणियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि राज्य Government ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है. उनके अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज में बाधा डालना एक गंभीर अपराध है और अगर इस तरह की प्रवृत्ति जारी रही तो जांच एजेंसियों की निष्पक्षता और कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हो जाएंगे.

शृंगला ने कहा कि कोर्ट ने साफ तौर पर माना है कि इस तरह का हस्तक्षेप कानून के खिलाफ है और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2008 से जुड़े कोयला घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के दौरान आई-पैक से जुड़े एक सह-संस्थापक की गिरफ्तारी भी हुई थी. उनके अनुसार आशंका जताई जा सकती है कि तृणमूल कांग्रेस के चुनावी प्रबंधन से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज जांच एजेंसियों के हाथ न लगें, इसी वजह से Chief Minister ने हस्तक्षेप किया.

हर्षवर्धन शृंगला ने कहा कि Supreme Court ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और Chief Minister द्वारा उठाए गए कदम पूरी तरह गलत थे.

इसके अलावा, कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Prime Minister Narendra Modi के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर भी शृंगला ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा न केवल गैर-संसदीय है, बल्कि Prime Minister पद की गरिमा के खिलाफ भी है. उन्होंने कहा कि Prime Minister मोदी ने देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कड़े फैसले लिए हैं, ऐसे में उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल पूरी तरह अनुचित है और एक वरिष्ठ नेता से इस तरह की टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जाती.

एएसएच/वीसी

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