
Mumbai , 12 मार्च . भारतीय सिनेमा में कई फिल्में आती हैं जो सिर्फ मनोरंजन तक सीमित रहती हैं. लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो समाज के मुद्दों को दिखाती हैं और लोगों के सोचने का नजरिया बदल देती हैं. अनुषा रिजवी की पहली फिल्म ‘पीपली लाइव’ ऐसी ही फिल्म थी. यह फिल्म 2010 में रिलीज हुई. इसमें किसानों और ग्रामीण India की समस्याओं को व्यंग्यपूर्ण तरीके से दिखाया गया. सनडांस फिल्म फेस्टिवल में इसका प्रीमियर हुआ.
अनुषा रिजवी का जन्म 13 मार्च 1978 को दिल्ली में हुआ था. बचपन से ही उनके अंदर गहराई से सोचने की क्षमता थी. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक की डिग्री हासिल की. इस दौरान उन्होंने समाज, राजनीति और संस्कृति को बारीकी से समझा. वहीं पत्रकारिता की दुनिया से करियर की शुरुआत करने पर उन्हें रिपोर्टिंग और डॉक्यूमेंट्री बनाने का अनुभव हासिल हुआ. इस दौरान उन्होंने समाज की जटिलताओं को करीब से देखा और महसूस किया कि किस तरह से सामान्य लोगों की जिंदगी छोटी-छोटी समस्याओं में उलझ जाती है. यही अनुभव बाद में उनकी फिल्मों का आधार बने.
2010 में अनुषा रिजवी ने फिल्म निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और अपनी पहली फिल्म ‘पीपली लाइव’ बनाई. इस फिल्म में उन्होंने किसानों के जीवन और Governmentी नीतियों की जटिलताओं को व्यंग्यपूर्ण अंदाज में दिखाया. फिल्म का मुख्य कथानक Government द्वारा लागू की गई भूख मिटाने की योजना और उसके आसपास होने वाली घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमता है. फिल्म में दिखाया गया कि कैसे ग्रामीण India में छोटे-छोटे फैसलों और सिस्टम की गलतियों का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है.
‘पीपली लाइव’ की खासियत यह थी कि यह फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर करती है. फिल्म का प्रीमियर सनडांस फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जो दुनिया का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल है. इस फेस्टिवल में यह फिल्म भारतीय फिल्मों की एक नई पहचान बनाने में सफल रही. इसके बाद इसे 83वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए India की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया.
अनुषा रिजवी आज एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता हैं, और कहानी सुनाने का उनका तरीका समाज की संवेदनाओं को समझने और दर्शकों तक सही संदेश पहुंचाने पर आधारित है.
–
पीके/डीएससी