ओटीटी के दौर में बदला भारतीय सिनेमा का चेहरा : पल्लवी चटर्जी

Mumbai , 22 अप्रैल . बंगाली सिनेमा की लोकप्रिय Actress पल्लवी चटर्जी ने के साथ खास बातचीत में मनोरंजन जगत में आए बदलावों और करियर के उतार-चढ़ाव पर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे ओटीटी ने कहानी कहने के तरीके और कलाकारों के लिए उपलब्धियां ला दी हैं.

Actress ने कहा, “मैं एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हूं, जो बचपन से ही इंडस्ट्री को देखती हुई हूं. एक Actress के तौर पर सिर्फ डायलॉग्स से परे भी बहुत सी चीजें नोटिस करते हैं. आस-पास के माहौल से सीखने और समझने के लिए बहुत कुछ होता है.”

उन्होंने कहा, “ओटीटी के आने से पहले एक निश्चित उम्र के बाद अभिनेत्रियों के लिए भूमिकाएं बहुत सीमित हो जाती थीं. उन्हें अक्सर एक ही जैसे किरदारों में बांध दिया जाता था. मैं कुछ सार्थक और रचनात्मक करना चाहती थी, इसलिए मैंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा.”

Actress ने आगे बताया कि प्रोडक्शन के दौरान उन्होंने सेट पर उपकरण उठाने तक का काम किया है. उनका मानना है कि फिल्म बनाना एक सामूहिक प्रयास है. दर्शक अक्सर फिल्म को अच्छी या बुरी कहकर आसानी से राय बना लेते हैं, लेकिन उसके पीछे की मेहनत, निवेश और भावनाओं को नहीं देखते.

पल्लवी चटर्जी ने कई भाषाई फिल्म इंडस्ट्री में काम किया है. विभिन्न भाषाओं में काम करने के अनुभव को उन्होंने के साथ साझा किया. उन्होंने बताया कि एक Actor के लिए किरदार सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन भाषा पर पकड़ होना भी उतना ही अनिवार्य है.

उन्होंने कहा, “यदि कोई Actor भाषा में सहज नहीं है, तो उसका पूरा ध्यान अभिनय के बजाय सही संवाद बोलने पर लगा रहता है. मैं हिंदी और बंगाली में सहज हूं, लेकिन जब मैंने उड़िया फिल्म की, तो मैंने वहां के स्थानीय लोगों और तकनीशियनों के साथ घंटों बैठकर अपने उच्चारण को सुधारा. सेट पर जाने से पहले होमवर्क करना हर कलाकार के लिए जरूरी है.”

Actress ने को पुराने और नए दौर की तुलना करते हुए कुछ मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “पहले फिल्में केवल कमर्शियल और आर्ट सिनेमा में बंटी होती थीं और दर्शकों के पास सीमित विकल्प हुआ करते थे. पुरानी तकनीक के मुकाबले आज की तकनीक ने सिनेमा की भव्यता बढ़ा दी है. डिजिटल क्रांति की वजह से आज दर्शक दुनिया भर का बेहतरीन कंटेंट देख रहे हैं. इससे उनकी समझ और उम्मीदें बढ़ गई हैं.”

एनएस/एबीएम

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