
New Delhi, 9 मार्च . India ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता, जिसके बाद टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, जय शाह और गौतम गंभीर हनुमान मंदिर गए. टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने पहले social media के जरिए ट्रॉफी लेकर मंदिर में जाने पर आपत्ति जताई और अब कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था.
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने से बातचीत में कहा कि आप टीम के लिए खेलते हैं. देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं. सभी उस टीम का हिस्सा हैं. 1983 में जब हम जीते थे, तब भी सभी धर्म के लोग थे. खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वो अपनी टीम का होता है. इन लोगों ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है. उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की तारीफ करते हुए कहा कि टीम भारत, हिंदुस्तान की टीम है.
उन्होंने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर कहा कि फिर India और Pakistan में क्या अंतर रह गया. उन्होंने कहा कि मैं खुद हिन्दू हूं, लेकिन खेलते वक्त कभी धर्म को नहीं जोड़ा. आर्ट का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया. हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था. उन्होंने कहा, “हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था.”
बता दें कि कीर्ति आजाद ने social media पर पोस्ट लिखकर ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर तीखी आलोचना की थी. उन्होंने social media पर लिखा था कि टीम इंडिया पर शर्म आती है.
उन्होंने लिखा कि जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के खिलाड़ी थे. हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि India (हिंदुस्तान) में लाए थे. आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?
उन्होंने आगे लिखा कि यह टीम India का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं! सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए. संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए. संजू ने टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था. यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की है. यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है.
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एएमटी/डीकेपी