
Mumbai , 18 अप्रैल . भाजपा नेता शाइना एनसी ने Saturday को विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल खारिज होने से साफ हो गया है कि विपक्ष महिला विरोधी है.
शाइना एनसी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “27 साल बाद महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था, वह भी सीटें बढ़ाकर. जो सीटें बढ़ रही थीं, वह किसी पुरुष की गद्दी छीनकर नहीं दी जा रही थीं, बल्कि अपने बलबूते हो रही थीं. फिर भी विपक्ष ने बिल को पास नहीं होने दिया.”
उन्होंने आगे कहा, “बार-बार जनगणना, परिसीमन, एससी-एसटी, आदिवासी, ओबीसी और मुस्लिम महिला का मुद्दा उठाया जा रहा था. कोई भी पार्टी जिस महिला को वोट देना चाहे, दे सकती है, लेकिन जिस ढंग से विपक्ष ने प्रस्तुत किया, उससे एक बात साफ है कि वे महिला विरोधी हैं. इसके लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और एमके स्टालिन को शर्म आनी चाहिए.”
शाइना एनसी ने आरोप लगाया कि विपक्ष बौखला गया है. उन्हें पता नहीं था कि बिल का कैसे समर्थन करें, इसलिए उन्होंने बार-बार बहाने बनाए. उन्होंने कहा, “यह सिर्फ नाटक था, कोई नीति या सच्ची नियत नहीं थी. विपक्ष महिलाओं के खिलाफ है.”
भाजपा नेता ने Prime Minister Narendra Modi की तारीफ करते हुए कहा, “पीएम मोदी ने जबरदस्त Political इच्छाशक्ति दिखाई. जहां पुरुष प्रधान मानसिकता हावी है, वहीं उन्होंने कहा कि हमारी बहनों और माताओं के लिए यह प्रावधान लाएंगे. ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सिर्फ एक संकल्प नहीं हैं, बल्कि गहरी विश्वास है कि परिवर्तन होगा. जब विकसित India बनेगा तो एक महिला भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेगी.”
वहीं, Actress और भाजपा प्रवक्ता मालविका अविनाश ने Bengaluru में कहा, “पुरुषों से पितृसत्ता की उम्मीद तो की ही जाती है, लेकिन यहां एक ऐसे Prime Minister हैं जो कहते हैं, ‘सारा श्रेय आप ले लीजिए, मैं तो बस ‘आपके नाम से Governmentी पैसों से विज्ञापन छपवा दूंगा. हो सकता है उन्होंने यह बात मजाक में कही हो, लेकिन उन्होंने जो कहा, उसमें बहुत गहरी बात छिपी थी, क्योंकि उन्होंने कहा था कि मैं इसका श्रेय नहीं लूंगा, इस विधेयक को पारित करने का श्रेय यह संसद लेगी.”
उन्होंने आगे कहा, “इसके ठीक विपरीत एक दूसरी मानसिकता भी देखने को मिलती है, जो कि महिलाओं की ओर से दिखाई गई पितृसत्ता है, और यही बात मुझे ज्यादा दुखी करती है. कांग्रेस और सपा के पुरुषों से पितृसत्ता की उम्मीद तो की जा सकती है, लेकिन महिलाओं के बारे में क्या कहेंगे? महिलाएं भी तो ठीक वैसी ही सोच रखती हैं.”
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एससीएच/डीकेपी