
अमरावती, 1 मई . गुंटूर की एक अदालत ने Friday को आंध्र प्रदेश के पूर्व Chief Minister वाईएस जगन मोहन रेड्डी के सहयोगी पुडी श्रीहरि को Chief Minister एन चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक social media पोस्ट से जुड़े एक मामले में जमानत दे दी.
श्रीहरि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के महासचिव (मीडिया विभाग) और जगन मोहन रेड्डी के पूर्व मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हैं. श्रीहरि को Thursday देर रात फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था. यह गिरफ्तारी कुप्पम शहर की एक अदालत से जमानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद हुई.
गुंटूर जिले के कोथापेटा से आई एक टीम ने उन्हें कुप्पम में गिरफ्तार किया और कोठापेटा Police स्टेशन ले गई, जहां उन्हीं आरोपों पर उनके खिलाफ एक अलग First Information Report दर्ज की गई. दो हफ्तों में यह तीसरी बार था जब श्रीहरि को गिरफ्तार किया गया.
Police की इस कार्रवाई की वाईएसआरसीपी ने कड़ी निंदा की और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन Government पर Political बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया.
गुंटूर के Governmentी अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया, जब Police ने वाईएसआरसीपी के एमएसलसी लेल्ला अप्पिरेड्डी को श्रीहरि से मिलने से रोक दिया. श्रीहरि को अदालत में पेश किए जाने से पहले मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गया था.
गुंटूर कोर्ट ने बाद में श्रीहरि को जमानत दे दी, जो एक पत्रकार भी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी नेतृत्व वाली गठबंधन Government पत्रकारिता को एक ‘संगठित अपराध’ मान रही है. श्रीहरि ने कहा कि उन्होंने कभी Police थाने या कोर्ट में कदम नहीं रखा, लेकिन उन्हें दो हफ्तों के अंदर ही कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है. उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, इसलिए उन्हें किसी बात का डर नहीं है.
गुंटूर में वाईएसआरसीपी कार्यालय में पार्टी नेताओं के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए श्रीहरि ने पिछले दो हफ्तों में अपने खिलाफ हुई लगातार गिरफ्तारियों और दर्ज मामलों पर गहरी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 साल के बेदाग करियर के बावजूद उनके साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि मीडिया समन्वय के काम को एक ‘आपराधिक गिरोह’ के तौर पर दिखाना चिंताजनक है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ख़तरनाक भी.
वाईएसआरसीपी महासचिव पोन्नवोलु सुधाकर रेड्डी ने इस घटना को ‘संवैधानिक मूल्यों और सत्ता के दुरुपयोग’ के बीच की लड़ाई बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी व्यक्ति को एक ही कथित अपराध के लिए बार-बार गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है?
उन्होंने कहा कि अदालतों ने कई बार Police की रिमांड की मांग को खारिज किया है और असंवैधानिक कार्रवाइयों के खिलाफ दखल दिया है.
श्रीहरि को सबसे पहले 15 अप्रैल को विजयवाड़ा में गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ यह मामला Chief Minister चंद्रबाबू नायडू की मॉर्फ की गई (बदली हुई) तस्वीरों वाले आपत्तिजनक social media पोस्ट करने के आरोप में दर्ज किया गया था.
इसके बाद उन्हें कुप्पम ले जाया गया, जहां उनके और वाईएसआरसीपी के एक अन्य पदाधिकारी गिरीश कुमार रेड्डी के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया था.
श्रीहरि को 16 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया गया. अदालत ने Police की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजने की मांग की गई थी. इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. बाद में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी.
जब Supreme Court ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, तो कुप्पम Police ने 29 अप्रैल को Bengaluru में श्रीहरि को फिर से गिरफ्तार कर लिया. उन्हें कुप्पम लाया गया, जहां 30 अप्रैल को उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया.
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पीएसके