
New Delhi, 16 मई . भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने Saturday को Madhya Pradesh हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े एएसआई के अनुपालन आदेश की कॉपी social media पर शेयर की. इस दौरान उन्होंने खुशी जताई की अब हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में निर्बाध रूप से प्रवेश की अनुमति है.
जैन ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर कॉपी शेयर करते हुए लिखा कि एएसआई ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में आदेश जारी किया है. अब हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में निर्बाध रूप से प्रवेश की अनुमति है.
वहीं, एएसआई के अनुपालन आदेश में कहा गया कि Madhya Pradesh हाई कोर्ट (इंदौर बेंच) ने अपने आदेश द्वारा यह माना है कि धार जिले (Madhya Pradesh) में स्थित भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है और यह देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है. हाईकोर्ट ने यह भी पाया है कि ऐतिहासिक साहित्य भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज से जुड़े संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करता है और साहित्य एवं स्थापत्य संदर्भ, जिनमें राजा भोज के काल से संबंधित संदर्भ भी शामिल हैं, देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर के अस्तित्व का संकेत देते हैं. ये तथ्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए शोध द्वारा समर्थित हैं.
इससे पहले विष्णु जैन ने Friday को Madhya Pradesh हाई कोर्ट के फैसले को “ऐतिहासिक” बताया. इंदौर की पीठ ने धार स्थित विवादित परिसर को राजा भोज की संपत्ति घोषित करते हुए हिंदुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया.
न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद मीडिया से बात करते हुए जैन ने कहा कि इंदौर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 7 अप्रैल, 2003 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द किया गया है.
उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट ने भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है और हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है.
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया है और Government को इस स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है.
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