Sunday , 11 April 2021

किसी ने नहीं सुनी दर्द से तड़पती रही गर्भवती महिला

लुधियाना . लुधियाना के सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल के लेबर रूम स्टाफ ने संवेदनहीनता की हद पार कर दी, जब प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची एक महिला दर्द से तड़पती रही लेकिन अस्पताल स्टाफ ने उसकी ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया. अस्पतालकर्मियों ने गौर नहीं किया तो अस्पताल परिसर के पार्क में बैठी महिलाओं ने उसका पार्क में ही प्रसव कराया. महिला ने दो शिशुओं को जन्म दिया. प्रसव के बाद लेबर रूम से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महिला को लेकर अस्पताल के अंदर लेकर गए. असुरक्षित तरीके से प्रसव कराए जाने की वजह से नवजात शिशुओं की हालत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें पीजीआइ के लिए रेफर कर दिया गया.

महिला के पति संतोष कुमार ने बताया कि वह धूरी लाइन के पास रहते हैं. मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं. उसकी आठ महीने की गर्भवती पत्नी उमा देवी को बुधवार (Wednesday) सुबह प्रसव पीड़ा होने लगी. उसे लेकर वह सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में आया. पूरा दिन स्टाफ ने टेस्ट करवाने में निकाल दिया. शाम चार बजे पत्नी को अस्पताल में भर्ती किया. अगले दिन वीरवार शाम चार बजे उन्हें कहा गया कि पत्नी को सीएमसी अस्पताल ले जाकर ईको करवाओ. गर्भ में शिशुओं की हार्ट बीट बढ़ी हुई थी. सीएमसी अस्पताल जाने के लिए कोई एंबुलेंस (Ambulances) उपलब्ध नहीं करवाई गई. वह पैदल ही सीएमसी जाने के लिए चल पड़े. अस्पताल के मुख्य गेट के पास पहुंचते ही पत्नी को दर्द तेज हो गई. वह वहीं पास में बैठ गई.

उसने लेबर रूम पहुंचकर स्टाफ को बताया कि पत्नी को बहुत तेज दर्द हो रहा है. इस पर स्टाफ का जवाब था कि दर्दें होता रहता है. पहले ईको करवाकर लाओ. जब वह वापस पार्क में आया तो कुछ महिलाओं ने उसकी पत्नी को चारों ओर से शाल से पर्दा कर रखा था. पार्क में ही पत्नी ने दो शिशुओं का जन्म दिया. उसने गेट पर मौजूद गार्ड को बताया कि उसकी पत्नी ने पार्क में बेटी और बेटे को जन्म दिया है. गार्ड ने उसे अंदर लेबर रूम में भेज दिया.

संतोष ने आरोप लगाया कि लेबर रूम के स्टाफ को जब बताया कि पत्नी ने पार्क में बच्चे को जन्म दे दिया और वह दर्द से तड़प रही थी, इसके बाद भी नर्स (Nurse) उनके साथ नहीं आई. पांच मिनट बाद दर्जा चार कर्मचारी उनके साथ बाहर आई, तब तक दूसरा बच्चा भी जन्म ले चुका था. जन्म के बाद दोनों शिशुओं को दर्जा चार कर्मी लेबर रूम में लेकर गई. संतोष ने आरोप लगाया कि बुधवार (Wednesday) से ही लेबर रूम के स्टाफ ने संवेदना नहीं दिखाई. अगर उनके दर्द को समझा होता तो उनके दोनों बच्चे इस समय सुरक्षित होते. उनकी हालत नहीं बिगड़ी. अस्पताल की एसएमओ डा. अमरजीत कौर का कहना है कि मामला उनके ध्यान में लाया गया है. शुक्रवार (Friday) को अस्पताल जाकर जांच करेंगी. लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर कार्रवाई होगी.

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