
New Delhi, 5 अप्रैल . एनआईए ने सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर जहर फैलाने की साजिश रचने वाले आईएसआईएस से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. एनआईए के अनुसार, यह एक जिहादी बायो-टेरर साजिश थी, जिसका मकसद आम लोगों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर जहर फैलाना था.
मुख्य आरोपी हैदराबाद निवासी डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन के साथ दो अन्य आरोपी आजाद और मोहम्मद सुहेल हैं. ये उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. इनके खिलाफ Ahmedabad की विशेष एनआईए अदालत में यूए(पी)ए एक्ट, बीएनएस और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई.
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी विदेशी आईएसआईएस हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे और उन्होंने मिलकर युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर जिहाद के नाम पर आतंक फैलाने की साजिश रची.
साजिश के तहत एक खतरनाक जैविक कैमिकल के इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी. यह एक बेहद जहरीला पदार्थ है, जो अरंडी के बीज से बनता है और केमिकल वेपन्स कन्वेंशन की सूची में शामिल है.
यह मामला सबसे पहले Gujarat एटीएस ने नवंबर 2025 में दर्ज किया था, जब डॉ. मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर अवैध हथियार, 4 लीटर अरंडी तेल और अन्य संदिग्ध सामान के साथ गिरफ्तार किया गया था.
एटीएस की जांच में उसी दिन दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि आजाद और सुहेल ने Rajasthan के हनुमानगढ़ में एक डेड-ड्रॉप साइट से पैसे और हथियार उठाकर Gujarat के छत्राल में पहुंचाए थे, जहां से मोहिउद्दीन ने उन्हें लिया.
जनवरी 2026 में जांच अपने हाथ में लेने के बाद एनआईए ने पाया कि मोहिउद्दीन लालच में आकर हैंडलर कहने पर उसने अपने हैदराबाद स्थित घर को गुप्त लैब में बदलकर ‘रिसिन’ तैयार करने की कोशिश की.
जांच में यह भी सामने आया कि अन्य दोनों आरोपी हैंडलर्स के संपर्क में थे, आतंक से जुड़े फंड का इस्तेमाल कर रहे थे, रेकी कर रहे थे और अवैध हथियारों की सप्लाई में शामिल थे.
सुहेल को इस साजिश में अहम कड़ी बताया गया है, जो हैंडलर और अन्य आरोपियों हथियारों के प्रबंधन का काम कर रहा था. उसने हथियारों की ढुलाई की, रेकी की और आईएसआईएस के झंडे भी तैयार किए.
एनआईए ने बताया कि इस मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी इस साजिश में शामिल अन्य लोगों और विदेशी हैंडलर्स की तलाश कर रही है.
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एएमटी/डीकेपी