
New Delhi, 24 जुलाई . राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया मुतवल्ली कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, जागरूकता अभियान और छात्रों के मुद्दों को लेकर विभिन्न नेताओं ने अपने विचार रखे. इस दौरान मौलाना असद महमूद मदनी, मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कई अहम मुद्दों पर टिप्पणी की.
ऑल इंडिया मुतवल्ली कॉन्फ्रेंस के उद्देश्य पर बोलते हुए मौलाना असद महमूद मदनी ने कहा कि इस पहल का मकसद लोगों के भीतर औकाफ के संरक्षण को लेकर जागरूकता पैदा करना है. लोगों को यह समझाया जा रहा है कि वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए और उनकी हिफाजत के लिए आवश्यकता पड़ने पर हर तरह का त्याग करने के लिए तैयार रहें. यह अभियान केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है. देश के विभिन्न हिस्सों में भी इसी तरह की गतिविधियां चल रही हैं. यह एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसके तहत लगातार काम किया जा रहा है.
मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने भी कॉन्फ्रेंस से सकारात्मक उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस सम्मेलन के माध्यम से वक्फ से जुड़े मुद्दों पर लोगों में अधिक जागरूकता आएगी. साथ ही, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर समाज पहले से अधिक गंभीर होगा. इस तरह के आयोजन समाज में जिम्मेदारी और भागीदारी की भावना को मजबूत करेंगे.
छात्रों के प्रदर्शन और Prime Minister मोदी के वीडियो संदेश को लेकर मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि सपा छात्रों के साथ खड़ी है और छात्रों के हितों का समर्थन करती है. शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर Government को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिए.
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि Prime Minister मोदी ने अब तक जो भी बड़े वादे किए, वे जमीन पर पूरे नहीं हुए. पहले रोजगार देने, सभी को आवास उपलब्ध कराने और किसानों की आय दोगुनी करने जैसे वादे किए गए थे, लेकिन इनमें से कोई भी दावा पूरी तरह साकार नहीं हुआ. Prime Minister का हालिया वीडियो संदेश युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास मात्र है. युवाओं को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस फैसले लेने की जरूरत है. यदि Government वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार चाहती है तो एजुकेशन लोन माफ करने और शिक्षा को सस्ता बनाने जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों की उच्च शिक्षा तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो सके.
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि देश का युवा अब केवल भाषणों से संतुष्ट नहीं होगा और Government को अपने वादों के बजाय ठोस कार्रवाई दिखानी होगी. उन्होंने Government द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाने की बात पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर जांच पूरी नहीं होगी और चार्जशीट दाखिल नहीं की जाएगी तो फास्ट-ट्रैक अदालतें भी प्रभावी नहीं हो पाएंगी. 2024 के नीट पेपर लीक मामले में भी निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, जिससे जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई. देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यापक सुधारों की आवश्यकता है और Government को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए.
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पीएसके/एबीएम