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Friday, 23 October 2026
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मध्य पूर्व संघर्ष ने दुनिया को सबसे बड़ा झटका दिया : यूएन चीफ

मध्य पूर्व संघर्ष ने दुनिया को सबसे बड़ा झटका दिया : यूएन चीफ

न्यूयॉर्क, 23 जून . संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मध्य पूर्व संघर्ष से पैदा हुई दिक्कतों को दुनिया के लिए बड़ा झटका करार दिया. उन्होंने कहा है कि इसने अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा झटके को जन्म दिया है. उनके अनुसार कई विकासशील देशों के लिए यह सिर्फ एक ऊर्जा संकट नहीं था बल्कि इसकी वजह से उन पर कर्ज का बोझ बढ़ा, खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी और उनके विकास की गति पर भी प्रभाव पड़ा.

अपनी राय उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर जाहिर की. उन्होंने लिखा, “कई विकासशील देशों के लिए यह सिर्फ ऊर्जा संकट नहीं है, बल्कि यह कर्ज, खाद्य सुरक्षा और विकास से जुड़ा एक बड़ा झटका भी है.”

गुटेरेस ने आगे कहा, “कोई भी शांति समझौता निश्चित रूप से आवश्यक राहत देगा, लेकिन इसके प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की संभावना है.”

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के कई शहरों को भारी नुकसान पहुंचा. जवाबी कार्रवाई में तेहरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया. ड्रोन हमलों के दायरे में कई ऊर्जा संयंत्र भी आए. इस बीच मध्यस्थता की कोशिश भी की गई. Pakistan, कतर और तुर्की जैसे देशों ने सीज फायर की कोशिश की. चालीस दिन बाद अस्थायी संघर्ष विराम से कुछ लगाम लगी लेकिन फिर हवाई हमले चालू हो गए.

अंततः 107 दिन बाद जी7 में ट्रंप के दस्तखत से शांति की उम्मीद जगी. फ्रांस के वर्साय पैलेस में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, वहीं मसूद पेजेश्कियन ने ईरान की ओर से इलेक्ट्रॉनिक साइन किए. स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दोनों देश मध्यस्थों के साथ मिले और 60 दिनी समझौता रोडमैप पर सहमत हुए.

यूएन चीफ ने ऊर्जा सेक्टर को झटके की बात इसलिए की क्योंकि संघर्ष के दौरान समुद्री नौवहन पर लगभग रोक लग चुकी थी. एक ओर ईरान ने होर्मुज पर आवाजाही रोक दी थी तो दूसरी ओर अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से एलपीजी, तेल आदि का परिवहन नहीं हो पा रहा था. दुनिया भर में तेल वितरण पर असर पड़ा तो मार्केट भी इसकी जद में आए. कई देशों ने तेल और गैस की खपत को नियंत्रित करने के उपाय भी किए.

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केआर/

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