
New Delhi, 25 मई . मेघालय के Chief Minister कोनराड के. संगमा ने Monday को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने एक व्यापक रोडमैप पेश किया, जिसका मकसद राज्य के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में सुधार करना है. साथ ही उन्होंने यह भी माना कि पिछले तीन सालों से मेघालय रैंकिंग में सबसे नीचे रहा है.
दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान संगमा ने कहा कि शिक्षा विभाग ने सीखने के नतीजों में मौजूद अहम कमियों की पहचान की है और इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाले लंबे समय से चले आ रहे सिस्टम से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए ढांचागत सुधार शुरू किए हैं.
Chief Minister ने बताया कि मेघालय में स्कूलों की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से संसाधनों का इस्तेमाल टुकड़ों में होता है, ग्रांट-इन-एड (सहायता अनुदान) देने के कई तरीके हैं, और प्रशासनिक पेचीदगियां हैं जो दशकों से बनी हुई हैं.
उन्होंने बताया कि करीब 30 लाख की आबादी होने के बावजूद, मेघालय में लगभग 14,600 स्कूल हैं. असम को छोड़कर, पूर्वोत्तर राज्यों में यह संख्या सबसे ज्यादा है. यह मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों से भी ज्यादा है.
संगमा ने कहा कि Government ने अब अपना ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने पर लगाया है. इसके लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें स्कूलों को आपस में मिलाना (कंसोलिडेट करना) और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना शामिल है, ताकि छात्र-शिक्षक अनुपात सुधरे और प्रयोगशालाओं व डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच आसान हो.
उन्होंने Union Minister को यह भी बताया कि राज्य Government कई तरह के ग्रांट-इन-एड सिस्टम को आसान बना रही है, ताकि प्रशासनिक बोझ कम हो और शिक्षा से जुड़े नतीजों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके.
Chief Minister ने कहा कि मेघालय ने एक समान वेतन ढांचा लागू किया है. इसमें एसएसए शिक्षकों के लिए भी एक तय वेतन ढांचा शामिल है, जिसका मकसद शिक्षकों के बीच समानता लाना, उनका मनोबल बढ़ाना और उनकी जवाबदेही तय करना है.
संगमा ने शिक्षकों के प्रशिक्षण और पेशेवर विकास कार्यक्रमों के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि दीक्षा-आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल और अपनी गति से सीखने वाले कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से लैस कर रहे हैं.
जिन अन्य सुधारों पर रोशनी डाली गई, उनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ‘तीन-भाषा फॉर्मूले’ को लागू करना, खासी और गारो भाषाओं की अनिवार्य पढ़ाई, खेल-आधारित शिक्षा, स्थानीय संदर्भों के हिसाब से तैयार पाठ्यपुस्तकें, शुरुआती कक्षाओं में ‘बिना बैग वाले दिन’ (बैग लेस डेज), और दूसरी कक्षा तक ‘समेटिव असेसमेंट’ (सालाना परीक्षा) को खत्म करना शामिल है.
निचली प्राथमिक स्कूलों के युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) के बारे में उन्होंने बताया कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए 14,582 स्कूलों में से 3,198 स्कूलों को पहले ही आपस में मिला दिया गया है या बंद कर दिया गया है.
Chief Minister ने शिक्षा मंत्री प्रधान को हाल ही में शुरू की गई ‘सीएम लीड फेलोशिप’ के बारे में भी जानकारी दी, जिसके तहत शिक्षा सुधारों की योजना, समन्वय और निगरानी को मजबूत करने के लिए राज्य के 12 जिलों में 12 फेलो तैनात किए जाएंगे.
उन्होंने आगे मेघालय शिक्षक प्रशिक्षण अकादमी (एमटीटीए) की स्थापना की भी घोषणा की, जो समग्र शिक्षा के तहत शिक्षक शिक्षा की देखरेख करेगी और शिक्षकों के निरंतर पेशेवर विकास के घंटों को बढ़ाएगी.
संगमा ने कहा कि एक स्पष्ट रोडमैप और मजबूत Political इच्छाशक्ति के साथ, मेघालय अपनी चुनौतियों पर काबू पाने और आने वाले वर्षों में अपने पीजीआई प्रदर्शन में काफी सुधार करने के लिए तैयार है. उन्होंने राज्य में हर बच्चे के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की Government की प्रतिबद्धता को दोहराया.
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एएसएच/वीसी