रीढ़ की हड्डी को लचीला और मन को शांत बनाता है ‘मारीच्यासन’

New Delhi, 7 मार्च . आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग तनाव, कमर दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं. ऐसे में योग एक आसान और कारगर तरीका है, जो शरीर को लचीला बनाता है और मन को शांत रखता है. इसी कड़ी में ‘मारीच्यासन’ एक ऐसा योगाभ्यास है, जिसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली होने समेत कई तरह की शारीरिक समस्याओं से निजात मिलता है.

मारीच्यासन को ‘मारीचि’ ऋषि के नाम पर जाना जाता है. ‘मारीच्यासन’ शब्द संस्कृत से बना है. इसमें ‘मारीच’ का अर्थ प्रकाश की किरण (सूर्य या चंद्रमा की किरण) होता है और ‘आसन’ का अर्थ बैठने की ‘मुद्रा’ या फिर योग की स्थिति होती है.

इस आसन के नियमित अभ्यास करने से यह आसन कंधों, कमर, गर्दन और पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है. साथ ही पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक असर डालता है.

आयुष मंत्रालय के अनुसार, मारीच्यासन मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) में लचीलापन बढ़ाने, पाचन क्रिया में सुधार करने और मधुमेह के प्रबंधन के लिए एक प्रभावी योगासन है. यह आसन शरीर में कार्य क्षमता को पुनर्जीवित करता है.

इसके नियमित अभ्यास से रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) बेहतर होता है, तनाव कम होता है और पेट के कई अंग सक्रिय होते हैं, जैसे लिवर, किडनी, प्लीहा, पेट, अग्न्याशय, छोटी आंत, पित्ताशय और प्रजनन तंत्र.

इसे करना बेहद आसान है. इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं. अब अपना दाहिना घुटना मोड़ें और बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें. सांस को छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें और पीछे की तरफ देखें. संभव हो, तो हाथों को पीठ के पीछे पकड़ें. 5-10 गहरी सांसें लेकर दूसरी तरफ दोहराएं. शुरुआत में आसन को धीरे-धीरे और योग शिक्षक की देखरेख में करें. सांस पर पूरा ध्यान दें, जल्दबाजी न करें.

नियमित योग से न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है. यह आसन शरीर को लचीला बनाता है और मन को शांत रखता है. वहीं, सही तरीके से सांस लेना और ध्यान केंद्रित करना इस आसन का सबसे बड़ा रहस्य है.

हालांकि, यह आसन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाएं, गंभीर कमर दर्द या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो डॉक्टर से सलाह लें.

एनएस/एएस

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