‘पहले सेट में बहुत गलतियां हुईं, फिर कुछ चीजें बदलीं,’ सेन ने बताई वापसी वाली जीत के पीछे की रणनीति

New Delhi, 18 अगस्त . भारतीय स्टार शटलर लक्ष्य सेन ने Tuesday को जीत के साथ अपने ‘बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026’ अभियान की शुरुआत की. लक्ष्य ने ‘राउंड ऑफ 64’ में ऑस्ट्रिया के कॉलिन्स फिलिमोन के खिलाफ 16-21, 21-8, 21-4 से जीत हासिल की.

लक्ष्य सेन का मानना है कि उनका शुरुआती गेम प्लान ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी की ताकत के हिसाब से था. लंबी कद-काठी वाले फिलिमोन फ्लैट एक्सचेंज में सहज थे और शुरुआती गेम में रैलियों पर उनका दबदबा था.

मैच जीतने के बाद लक्ष्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मैं पहले सेट में बहुत छोटे ड्राइव खेल रहा था और फिर, जब मैं ड्राइव के लिए जा रहा था, तो वह लंबा था, और वह उन शॉट्स को बहुत आसानी से खेल रहे थे. मैं उन शॉट्स को खेलने में फंस रहा था. इसलिए दूसरे सेट में, मैंने खेल को थोड़ा और खोलने की कोशिश की. मैंने कुछ लिफ्ट और रैलियां कीं, और फिर मैं अपने शॉट्स खुलकर खेल पाया. नहीं तो, पहले सेट में बहुत सारी गलतियां हुईं, और गेम प्लान थोड़ा अलग था. मैंने दूसरे और तीसरे सेट में कुछ चीजें बदलीं, इसलिए नतीजे अलग रहे.”

पहला गेम शुरू में कड़े मुकाबले वाला था, लेकिन बाद में फिलिमोन ने बढ़त बना ली और 21-16 से जीत हासिल की. ​​सेन मानते हैं कि उन्होंने कोर्ट का सही इस्तेमाल नहीं किया था और उन्हें ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी को फ्लैट एक्सचेंज में हावी होने देने के बजाय लंबी रैलियां खेलनी चाहिए थीं.

उन्होंने कहा, “मैं जो खेल खेल रहा था, वह सही नहीं था. मुझे खेल को थोड़ा और खोलना था, उसे रैलियों में लाना था. दूसरे सेट में, मैंने ऐसा किया, और इससे फर्क पड़ा.”

कोर्ट की स्थितियों ने भी मुकाबले पर असर डाला. सेन ने मैच की शुरुआत उस तरफ से की जहां हवा का बहाव (ड्रिफ्ट) तेज था, जिससे शटल को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, खासकर लिफ्ट के दौरान. जब उन्होंने अपनी साइड बदली, तो भारतीय खिलाड़ी को अपनी योजनाएं लागू करने में अधिक आसानी महसूस हुई.

लक्ष्य ने कहा, “मैंने हवा वाली तरफ से खेलना शुरू किया, इसलिए ‘लिफ्ट’ पर शटल को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था और मेरी कई ‘लिफ्ट’ काफी छोटी रह जा रही थीं. फिर दूसरे सेट में, मुझे पता था कि मैं बेहतर तरफ खेल रहा हूं, इसलिए मैं खुलकर अपना गेम खेल सका.”

इन बदलावों का तुरंत फायदा मिला. सेन ने दूसरा गेम 21-8 से आसानी से जीता और फिर निर्णायक गेम में और भी शानदार खेल दिखाते हुए उसे सिर्फ 14 मिनट में 21-4 से अपने नाम किया.

भारतीय खिलाड़ी ने मैच के दौरान कोचिंग स्टाफ की भूमिका का भी जिक्र करते हुए बताया, “हमारी ज्यादातर बातचीत ‘ड्रिफ्ट’ और कुछ जरूरी बातों के बारे में थी. वह लंबे कद के खिलाड़ी हैं, इसलिए मेरी ‘क्रॉस लिफ्ट’ थोड़ी छोटी रह जा रही थीं. वह इसका फायदा उठा रहा था और मुझे कोर्ट पर ज्यादा दौड़ना पड़ रहा था. वे मुझे बस थोड़ा ऊंचा ‘लिफ्ट’ करने और ‘फ्लैट ड्राइव’ से बचने के लिए कह रहे थे, क्योंकि वह लंबे हैं और आसानी से पूरे कोर्ट को कवर कर लेते हैं. साथ ही, अपने मौकों का इंतजार करना और अटैक करने के लिए बेहतर मौके बनाना भी जरूरी था.”

आरएसजी

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