
Mumbai , 19 अगस्त . Maharashtra भर की लाखों कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के लिए सेल्फ-रीडेवलपमेंट प्रोसेस में अटके मुद्दों और रेवेन्यू से जुड़ी रियायतों को तुरंत हल करने के एक अहम कदम उठाया गया है. इस क्रम में रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रकांत बावनकुले ने Wednesday को अधिकारियों को ‘डीम्ड कन्वेयंस’ प्रोसेस को तेज और आसान बनाने का निर्देश दिया.
राज्य में रजिस्टर्ड लगभग 1,15,000 हाउसिंग सोसायटियों में से करीब 60,000 से 70,000 सोसायटियों ने अभी तक अपना ‘डीम्ड कन्वेयंस’ पूरा नहीं किया है. कोऑपरेशन, रेवेन्यू, सेटलमेंट और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन (आईजीआर) विभाग अब मिलकर इस प्रोसेस को पूरा करेंगे.
उनके ऑफिस से जारी एक रिलीज के अनुसार, रेवेन्यू मिनिस्टर ने निर्देश दिया कि रजिस्टर्ड हाउसिंग सोसायटियों के नाम सीधे प्रॉपर्टी कार्ड या 7/12 लैंड टाइटल एक्सट्रैक्ट पर ‘अन्य अधिकार’ वाले कॉलम में दर्ज किए जाएं.
रेवेन्यू विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ‘डीम्ड कन्वेयंस’ एक कानूनी प्रोसेस है, जिसके तहत जमीन और बिल्डिंग का मालिकाना हक हाउसिंग सोसाइटी को ट्रांसफर किया जाता है, जब कोई बिल्डर या डेवलपर स्वेच्छा से ऐसा करने में नाकाम रहता है या मना कर देता है. Maharashtra ओनरशिप फ्लैट्स एक्ट (एमओएफए) जैसे कानूनों के तहत, डेवलपर्स को सोसाइटी बनने के चार महीने के भीतर मालिकाना हक ट्रांसफर करना होता है, और ‘डीम्ड कन्वेयंस’ सहयोग न करने वाले बिल्डर को दरकिनार करने का एक तरीका देता है.
बावांकुले ने प्रमुख नीतियों को अंतिम रूप देने और उनके त्वरित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए. बैठक में, अधिकारियों ने आवास समितियों द्वारा सामना की जा रही लंबे समय से लंबित समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की, जिसके परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.
मंत्री के अनुसार, कई आवास समितियों को अपनी स्व-पुनर्विकास योजनाओं में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे एकीकृत विकास नियंत्रण और संवर्धन विनियम (यूडीसीपीआर) के अंतर्गत शामिल नहीं हैं.
इस समस्या के समाधान के लिए, उन्होंने 2019 के Governmentी संकल्प (जीआर) के अनुरूप कर रियायतें और 10 प्रतिशत प्रोत्साहन लागू करने का निर्देश दिया.
इसके अतिरिक्त, उन्होंने अधिकारियों को स्व-पुनर्विकास के लिए ‘कार्य अनुबंध’ और ‘विकास समझौते’ के लिए एक सरलीकृत मानक प्रारूप तैयार करने का निर्देश दिया. आवास विभाग को वित्त विभाग से 4 प्रतिशत रियायत प्राप्त करने के लिए एक त्वरित प्रस्ताव प्रस्तुत करने और पंजीकरण महानिरीक्षक (आईजीआर) से स्पष्टीकरण प्राप्त करने का भी निर्देश दिया गया.
हालांकि राज्य Government ने पहले Maharashtra आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएचएडीए) की सहकारी आवास समितियों को गैर-कृषि कर से छूट दी थी, लेकिन बैठक में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कुछ क्षेत्रों में अभी भी गैर-कृषि कर वसूला जा रहा है. बावनकुले ने शहरी भूमि सीमा अधिनियम के तहत आरक्षित फ्लैटों के संबंध में एक स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करने के आदेश जारी किए.
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एमएस/