एलपीजी की कमी चिंता का विषय, घरों व व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं पर पड़ रहा है असरः खड़गे

New Delhi, 16 मार्च . कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देश में उत्पन्न हुए एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया है. Monday को राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष ने पूरे देश में एलपीजी की आपूर्ति को प्रभावित किया है.

खड़गे के मुताबिक आज स्थिति यह है कि कई जगहों पर एलपीजी की कमी के कारण हाहाकार जैसी स्थिति बन गई है. इसका असर गरीब और कमजोर तबकों, मध्यम वर्गीय परिवारों, आम घरों, रेस्तरां, हॉस्टलों और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं पर पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि India अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है. इसमें भी लगभग 90 प्रतिशत आयात स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के रास्ते होता है. इस लिहाज से मौजूदा हालात घरेलू उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं. देश के लगभग हर हिस्से में इसका असर देखा जा रहा है. घरों में लोग परेशान हैं. छोटे-छोटे ढाबे, रेस्तरां, हॉस्टल और सामुदायिक रसोई तक प्रभावित हो रहे हैं. कई जगहों पर सामुदायिक किचन से लेकर सामान्य रसोई तक बंद होने की स्थिति बन गई है. इसके साथ ही एमएसएमई और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी एलपीजी मिलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि यह चिंता का विषय है कि कई प्रतिष्ठानों को अपने संचालन सीमित करने पड़े हैं, जबकि कुछ लोग 5,000 रुपये से अधिक प्रति सिलेंडर की ऊंची कीमत पर एलपीजी खरीदने को मजबूर हैं. Union Minister हरदीप सिंह पुरी ने यह दावा किया था कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है और लोगों को अफवाहों से सावधान रहना चाहिए. लेकिन जमीनी हकीकत Governmentी दावों से अलग नजर आ रही है. जब Government भारतीय नागरिकों को ईरान में स्थिति बिगड़ने की आशंका को लेकर सलाह जारी कर रही थी, उसी समय यह स्पष्ट हो गया था कि पश्चिम एशिया में तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है.

खड़गे ने कहा कि ऐसी स्थिति में Government से मेरा आग्रह है कि वह तुरंत देश में एलपीजी की आपूर्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे. आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के लिए वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों पर काम करे, और आम नागरिकों तथा छोटे व्यवसायों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए. उन्होंने कहा कि Government को इस क्षेत्रीय तनाव और संभावित व्यवधान के संकेत अवश्य मिले होंगे. इसका अर्थ यह है कि Government को यह बात अच्छी तरह मालूम थी कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के रास्ते आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है. ऐसी स्थिति में यदि एलपीजी आयात को लेकर समय रहते अग्रिम योजना बनाई जाती, वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जातीं और आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित किया जाता, तो आज देश को इतनी कठिन स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.

खड़गे ने कहा कि संकट को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया और इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों तथा व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. उन्होंने Government से आग्रह किया कि वह इस पूरे मामले पर स्पष्ट बयान दे. एलपीजी आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए त्वरित कदम उठाए और भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक रणनीति तैयार करे. उन्होंने कहा कि Government ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए हैं. वहीं सिलेंडर बुक करने के बाद वेटिंग पीरियड शहरों में 21 से बढ़ाकर 25 दिन और गांवों को रिमोट इलाकों में 25 से लेकर 35 दिन तक कर दिया गया है.

जीसीबी/एएस

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