
New Delhi, 23 मार्च . आज के समय में कम उम्र से ही सफेद बालों की समस्या होने लगी है. सफेद बाल होना बुढ़ापे की निशानी नहीं, बल्कि पोषण की कमी को दिखाता है.
बाल सफेद होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे बढ़ते पित्त और खराब जीवनशैली से जोड़कर देखा गया है. असंतुलित पित्त दोष न सिर्फ बालों के सफेद होने का मुख्य कारण होता है, बल्कि पेट से जुड़े रोग भी पित्त के असंतुलन की वजह से ही होते हैं.
आयुर्वेद के अनुसार, असमय बालों के सफेद होने के पीछे का मुख्य कारण पित्त दोष का बढ़ना, गलत खान-पान, तनाव और खराब जीवनशैली है. अगर जीवनशैली को नियमित कर लिया जाए और वात को भी संतुलित कर लिया जाए, तो सफेद बालों की समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है. इसके लिए आयुर्वेद में कई तरीके भी बताए गए हैं. सफेद बालों की वृद्धि को रोकने के लिए शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरफ के पोषण का ध्यान देना जरूरी है.
सबसे पहले पित्त को संतुलित करने की जरूरत है. इसके लिए कम मसालेदार और कम तैलीय भोजन का सेवन करें, चाय, खट्टी चीजें, कॉफी, और अधिक नमक वाली चीजों को आहार में कम करें. ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में पित्त को बढ़ाते हैं. आयुर्वेद में सफेद बालों की समस्या से निपटने के लिए आहार का वर्णन भी किया गया है. इसके लिए आहार में आंवला, चुकंदर, घी, काली मुनक्का, शतावरी और त्रिफला चूर्ण को शामिल करें. बालों में शुद्ध नारियल तेल और भृंगराज तेल से हफ्ते में दो बार मालिश करें. इससे काफी हद तक सफेद बालों की समस्या को रोका जा सकता है.
बालों के असमय सफेद होने के पीछे का एक कारण मानसिक तनाव भी है. आधी-अधूरी नींद, आंखों पर अत्याधिक दबाव, गुस्सा और चिड़चिड़ेपन की वजह से भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. ऐसे में नींद पूरी लें और अपने गुस्से पर नियंत्रण करें. खुद को शांत रखने के लिए खुली हवा में सांस लें और कोशिश करें कि जितना हो सके, प्रकृति के साथ समय बिताएं.
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पीएस/एबीएम