
तिरुवनंतपुरम, 27 मार्च . आगामी केरल विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा और सीपीआई(एम) के बीच कथित ‘गुप्त समझौते’ के आरोप ने सियासी माहौल गरमा दिया है. इस मुद्दे पर Chief Minister पिनाराई विजयन और नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है.
पिछले दो दिनों से चल रहे इस विवाद पर Friday को प्रतिक्रिया देते हुए Chief Minister पिनाराई विजयन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) कुछ सीटों या वोटों के लिए ‘छोटी Political चालें’ नहीं चलती.
उन्होंने कहा, “लोग सब कुछ देख रहे हैं और उसी के अनुसार जवाब देंगे. राजनीति केवल गणित नहीं है.” इस बयान के जरिए उन्होंने भाजपा और सीपीआई(एम) के बीच किसी भी तरह के समझौते की संभावना को नकार दिया.
सीएम विजयन ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ही भाजपा और दक्षिणपंथी ताकतों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने वडकारा और बेपोर जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वामपंथ विरोधी वोटों को एकजुट करने की कोशिश की गई थी लेकिन जनता ने इसे खारिज कर दिया और वाम दलों को जीत मिली.
Chief Minister ने 1977 के चुनावों के दौरान आरएसएस से जुड़े आरोपों को भी ‘बेबुनियाद और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया’ बताया. उन्होंने कहा कि उस समय कन्नूर के Political माहौल को जानने वाले लोग जानते हैं कि वे खुद आरएसएस के निशाने पर थे.
उन्होंने कहा, “दशकों बाद अब यह माना जा रहा है कि कोई भी झूठ सच की तरह पेश किया जा सकता है. कांग्रेस इसी तरह का प्रचार कर रही है.”
सीएम विजयन ने ऐतिहासिक उदाहरणों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि ईएमएस नंबूदरीपाद को हराने के प्रयासों और दीनदयाल उपाध्याय से जुड़े अभियानों में कांग्रेस ने कभी-कभी आरएसएस समर्थित ताकतों के साथ अप्रत्यक्ष सहयोग किया था. उन्होंने दोहराया कि वामपंथी दल हमेशा सांप्रदायिकता के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे हैं.
इसके अलावा, सीएम विजयन ने भाजपा नेताओं द्वारा गुरुवायूर जैसे क्षेत्रों में धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर दिए गए बयानों की आलोचना की. उन्होंने इसे केरल की राजनीति में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश बताया.
उन्होंने कहा, “केरल एक ऐसा राज्य है जहां लोग बिना जाति और धर्म के भेदभाव के साथ रहते हैं और यह देश में सेक्युलरिज्म का मजबूत गढ़ है.”
हालांकि, इन जवाबों के बावजूद ‘डील’ का आरोप चुनावी माहौल में तेजी से फैल रहा है. Political विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा खासकर मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उठाया जा रहा है, जो राज्य की आबादी में 25 प्रतिशत से अधिक हैं और 2021 में वामपंथ की जीत में अहम भूमिका निभा चुके हैं.
सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही सीपीआई(एम) के लिए यह विधानसभा चुनाव काफी अहम है.
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वीकेयू/पीएम