
New Delhi, 17 अगस्त . Prime Minister Narendra Modi के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले से दिए गए भाषण को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और अरविंद केजरीवाल ने केंद्र Government पर तीखा हमला बोला है. केजरीवाल ने Prime Minister के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर दिमागी Naxalite कौन है? उन्होंने आरोप लगाया कि देश में जो व्यक्ति Government से सवाल करता है, व्यवस्था में बदलाव की मांग करता है और बेहतर सुविधाओं की आवाज उठाता है, उसे दिमागी Naxalite बताया जा रहा है.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जो व्यक्ति देशभक्ति की बात करता है और देश की समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद करता है, क्या वह दिमागी Naxalite है? उन्होंने कहा कि जो इस देश में सवाल पूछता है, वह दिमागी Naxalite है. जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, उसे भी Naxalite कहा जा रहा है. केजरीवाल ने Prime Minister के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो अपने बच्चों के लिए अच्छे Governmentी स्कूल चाहता है, बेहतर अस्पताल चाहता है और आम लोगों के लिए सुविधाएं चाहता है, उसे भी दिमागी Naxalite करार दिया जा रहा है.
केजरीवाल ने कहा कि जो नागरिक साफ पानी, बेहतर बिजली व्यवस्था, सीवर और ड्रेनेज की सुविधा की मांग करता है, क्या वह देश विरोधी हो गया? उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त India का सपना देखने वाले लोगों को लेकर भी सवाल उठाया. उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है और देश में ईमानदार तथा जवाबदेह शासन की मांग करता है, तो क्या उसे भी ‘दिमागी Naxalite’ कहा जाएगा? आप संयोजक ने कहा कि जो Prime Minister और भारतीय जनता पार्टी से डरता नहीं है और Government से सवाल करने की हिम्मत रखता है, उसे भी इस नजरिए से देखा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि जो नागरिक विकसित India का सपना देखता है और देश को बेहतर बनाने के लिए Government से जवाब मांगता है, वह किसी भी तरह से देश विरोधी नहीं हो सकता. केजरीवाल ने अपने बयान में स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारी भगत सिंह का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर आज भगत सिंह जिंदा होते और देश की व्यवस्था में बदलाव तथा आजादी के मूल्यों की बात करते, तो Prime Minister के बयान के हिसाब से उन्हें भी ‘दिमागी Naxalite’ कहा जा सकता था.
इसी तरह उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति समानता, अधिकार और सामाजिक न्याय की बात करता है, तो क्या उसे भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा? दरअसल, Prime Minister Narendra Modi ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि देश में हथियारबंद नक्सलवाद को काफी हद तक समाप्त किया जा चुका है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से भी सतर्क रहने की जरूरत है.
Prime Minister के इसी बयान को लेकर विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया सामने आ रही है. आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर केंद्र Government को घेरा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में Government से सवाल पूछना, नागरिक सुविधाओं की मांग करना और व्यवस्था में सुधार की आवाज उठाना जनता का अधिकार है. आप नेताओं ने Prime Minister के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि असहमति और सवालों को किसी आपराधिक या राष्ट्रविरोधी विचारधारा से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.
–
पीकेटी/पीएम