
Patna, 7 जुलाई . जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने Prime Minister Narendra Modi के “एक देश में दो झंडे नहीं हो सकते” वाले बयान का समर्थन करते हुए कहा कि India का शासन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान के अनुसार चलता है.
जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि देश में दो संविधान रखने का कोई भी प्रयास पूरी तरह गलत होगा और इसे देश-विरोधी कदम माना जाएगा.
श्याम रजक ने कहा कि India एक संप्रभु राष्ट्र है और यहां केवल एक संविधान, एक व्यवस्था और एक कानून होना चाहिए. उन्होंने संविधान की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए संवैधानिक व्यवस्था का पालन जरूरी है.
बता दें कि Prime Minister Narendra Modi ने पिछले दिनों डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर कहा था कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश में दो संविधान, दो Prime Minister और दो झंडों की बात का पुरज़ोर विरोध किया था.
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर जदयू विधायक ने कहा कि मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही इससे जुड़े कई विवाद सामने आते रहे हैं. उन्होंने कहा कि चंदा संग्रह के दौरान भी कई लोगों ने सवाल उठाए थे.
रजक ने बताया कि इस मामले में जांच समिति बनाई गई है और समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए. ट्रस्ट को अपने स्तर पर निर्णय लेने का अधिकार है और यदि ट्रस्ट ने आरोपियों को हटाने का फैसला किया है तो यह एक सकारात्मक कदम है.
पश्चिम बंगाल के पाठ्यक्रम में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को शामिल किए जाने के फैसले पर भी श्याम रजक ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे अच्छा निर्णय बताते हुए कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी देशभक्त थे और उनके योगदान को पूरे देश के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इतिहास में शेरशाह सूरी जैसी अन्य महान हस्तियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने ग्रैंड ट्रंक रोड का उदाहरण देते हुए कहा कि यह आज भी उनकी दूरदर्शिता की मिसाल है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सीएए लागू करने की प्रक्रिया तेज करने वाले बयान पर श्याम रजक ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों को मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि नागरिकता देने की प्रक्रिया में आवेदनों की जांच जरूरी है और ऐसे फैसले धर्म या जाति के आधार पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए. यदि Government इस दिशा में आगे बढ़ रही है तो निर्णय निष्पक्ष और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप होने चाहिए.
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एसएके/पीएम