
Bengaluru, 18 अगस्त . कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा बी. साहूकार को बड़ी राहत देते हुए उनके निलंबन को रद्द कर दिया है. जस्टिस सूरज गोविंदराज की अध्यक्षता वाली पीठ ने Governor थावरचंद गहलोत द्वारा 10 जुलाई को जारी निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.
हाईकोर्ट ने कहा कि निलंबन आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, क्योंकि मंत्रिमंडल ने केपीएससी अध्यक्ष के निलंबन की न तो सिफारिश की थी और न ही ऐसा कोई सुझाव दिया था. अदालत ने स्पष्ट किया कि Governor को मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुरूप कार्य करना चाहिए था. इसी आधार पर अदालत ने निलंबन आदेश को निरस्त और शून्य घोषित कर दिया.
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि साहूकार को सात दिनों के भीतर केपीएससी अध्यक्ष के पद पर बहाल किया जाए, हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि साहूकार अपनी बेटियों की नियुक्ति से संबंधित किसी भी मामले में कोई निर्णय नहीं लेंगे.
साहूकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने दलील दी थी कि निलंबन कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं था. याचिका में साहूकार ने तर्क दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ जांच के लिए Governor की सिफारिश पर President द्वारा Supreme Court को संदर्भ भेजे जाने तक Governor को उन्हें निलंबित करने का अधिकार नहीं है.
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर विवाद जारी है. पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में गड़बड़ियों की जांच भी चल रही है.
Enforcement Directorate (ईडी) ने Tuesday को कर्नाटक और Ahmedabad में 21 स्थानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई केपीएससी द्वारा वेटरिनरी अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में की गई.
Bengaluru जोनल कार्यालय की ईडी टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया. जिन स्थानों पर छापेमारी की गई उनमें केपीएससी कार्यालय, निलंबित अध्यक्ष साहूकार का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का घर, बिचौलियों के ठिकाने, चयनित अभ्यर्थियों के परिसर तथा परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन का कार्य संभालने वाली एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय शामिल हैं.
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एससीएच/वीसी