
New Delhi, 5 अक्टूबर . भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने पंजाब की कानून व्यवस्था, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग, एसआईआर, चुनाव आयोग, उत्तर प्रदेश के राज्यसभा उम्मीदवारों और राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेतृत्व के बयानों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति को बेहद खराब बताते हुए भगवंत मान Government पर निशाना साधा. वहीं, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर उन्होंने Supreme Court के रुख का हवाला दिया.
पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर आरपी सिंह ने कहा कि राज्य में स्थिति बेहद खराब और लगातार बिगड़ती जा रही है. पंजाब में हत्याएं हो रही हैं, ड्रग्स का खुलेआम कारोबार चल रहा है और फिरौती तथा रंगदारी की घटनाएं भी सामने आ रही हैं. लोगों को फोन करके धमकियां दी जाती हैं कि अगर तय रकम शाम तक नहीं भेजी गई तो उनके बेटे का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी जाएगी.
आरपी सिंह ने कहा कि पंजाब में सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है. स्थिति सिर्फ आम लोगों के लिए ही चिंताजनक नहीं है, बल्कि Policeकर्मी भी हथियारबंद अपराधियों के निशाने पर हैं. उन्होंने पंजाब Government से कानून-व्यवस्था पर गंभीरता से काम करने की मांग की.
6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग की ओर मार्च किए जाने को लेकर आरपी सिंह ने कहा कि विपक्ष का काम विरोध करना है, लेकिन विरोध तार्किक आधार पर होना चाहिए. विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने की मांग लेकर Supreme Court गए थे, लेकिन Supreme Court ने तत्काल निलंबन से इनकार कर दिया. अदालत ने अब मामले में सीईसी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तारीख और समय दिया है. इसके बावजूद विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विपक्ष को Supreme Court के फैसले और प्रक्रिया पर भरोसा है तो फिर इस तरह के प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ रही है.
भारत-Pakistan संबंधों को लेकर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की टिप्पणी पर आरपी सिंह ने कहा कि अय्यर कांग्रेस के नेता हैं और अब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को जवाब देना होगा कि क्या India को आतंकवाद को लेकर Pakistan के साथ बातचीत करनी चाहिए. उन्होंने मणिशंकर अय्यर के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक की क्षमता होने की बात कहते हुए बातचीत की मेज पर बैठने की जरूरत बताई थी. कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि Pakistan के साथ बातचीत को लेकर उसकी नीति क्या है.
उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची पर प्रतिक्रिया देते हुए आरपी सिंह ने कहा कि पार्टी ने सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की मांग को ध्यान में रखते हुए आठ नए चेहरों का चयन किया है. इन उम्मीदवारों से उम्मीद है कि वे राज्यसभा की गरिमा बढ़ाएंगे और उच्च सदन में प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे. उम्मीदवारों का चयन पार्टी के संगठनात्मक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर किया गया है.
राहुल गांधी के चुनावी मुद्दों को लेकर आरपी सिंह ने कहा कि बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी ने ‘वोट अधिकार यात्रा’ निकाली थी, लेकिन बाद में तेजस्वी यादव ने भी अपनी अलग यात्रा शुरू की. बिहार की जनता ने इन प्रयासों को पूरी तरह नकार दिया. उन्होंने एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाया. आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं, वहां एसआईआर और चुनाव आयोग की प्रक्रिया ठीक बताई जाती है, जबकि चुनाव हारने के बाद वही प्रक्रिया गलत बताई जाने लगती है. उन्होंने केरल, तेलंगाना, Himachal Pradesh, तमिलनाडु और Jharkhand का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष की Government बनने या चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग को लेकर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन हार के बाद आयोग पर आरोप लगाए जाते हैं.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े बयान पर आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस में कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार काम होना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति के आदेश से चलने वाली निजी पार्टी नहीं है. ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले भी कई बार इस सवाल को उठा चुका है. ईवीएम को लेकर मामला अदालत तक गया था और अदालत में विपक्ष को राहत नहीं मिली. उन्होंने कांग्रेस के पुराने चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 2004 और 2009 के चुनाव भी इसी ईवीएम व्यवस्था के माध्यम से जीते थे.
आरपी सिंह ने आगे कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर ईवीएम और चुनाव आयोग सही बताए जाते हैं, जबकि हार के बाद उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना Political सुविधा के अनुसार मुद्दा उठाने जैसा है. उन्होंने विपक्ष से चुनावी हार की समीक्षा करने और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच अपने काम और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने की बात कही.
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पीएसके/डीकेपी