न्यायमूर्ति राजेश बिंदल एक विशिष्ट न्यायिक करियर के बाद सर्वोच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए

New Delhi/चंडीगढ़, 15 अप्रैल . Supreme Court के जज जस्टिस राजेश बिंदल Wednesday को रिटायर हो गए. उन्होंने Supreme Court के अलावा कई हाई कोर्ट में करीब 20 साल तक लंबा और सफल न्यायिक करियर बिताया.

अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस बिंदल ने अप्रत्यक्ष कर (इंडायरेक्ट टैक्स) मामलों में विशेष पहचान बनाई. साथ ही उन्होंने न्यायिक प्रणाली और मध्यस्थता में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में भी अहम योगदान दिया. उन्होंने पंजाब-Haryana, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, कलकत्ता और इलाहाबाद हाई कोर्ट में सेवाएं दीं.

Haryana के अंबाला में 16 अप्रैल 1961 को जन्मे जस्टिस बिंदल ने 1985 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की. उसी साल सितंबर में उन्होंने पंजाब और Haryana हाई कोर्ट में वकालत शुरू की.

वह एराडी ट्रिब्यूनल और Supreme Court में सतलुज-यमुना जल विवाद के मामले में Haryana की ओर से पेश हुए थे. 22 मार्च 2006 को उन्हें पंजाब और Haryana हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

पंजाब और Haryana हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने कहा, “अपने कार्यकाल के दौरान उनकी पहचान ऐसे जज के रूप में रही, जो मामलों का तेजी से निपटारा करते थे और जिन्हें अप्रत्यक्ष कर मामलों का गहरा अनुभव था.”

जस्टिस बिंदल के मार्गदर्शन में Haryana ने हाई कोर्ट और जिला स्तर पर ‘मुकदमा प्रबंधन प्रणाली’ विकसित की, जिससे Governmentी मुकदमों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके. बाद में इस प्रणाली को पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी अपनाया गया.

वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की एक समिति के सदस्य भी थे. इस समिति का काम लोक अदालतों और मध्यस्थता व्यवस्था की समीक्षा करना और कमजोर वर्गों के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के सुझाव देना था.

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट में ट्रांसफर होने से पहले जस्टिस बिंदल चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष रहे. इसके अलावा, वे कंप्यूटर कमेटी सहित कई समितियों के चेयरमैन भी थे.

उन्होंने कई सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इनमें (मेडिको-लीगल जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सिस्टम) भी शामिल है. यह एक वेब-आधारित और केंद्रीकृत सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल मेडिको-लीगल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया जाता है. इसमें डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों को उनकी भूमिका के अनुसार सुरक्षित एक्सेस दिया जाता है.

शुरुआत में यह सिस्टम पंजाब, Haryana और चंडीगढ़ में लागू किया गया था. बाद में इसे Himachal Pradesh, Madhya Pradesh और उत्तर प्रदेश में भी अपनाया गया. दिसंबर 2023 में केंद्र Government ने इसे सभी राज्यों में लागू करने का फैसला किया.

जस्टिस बिंदल का बाद में ट्रांसफर कलकत्ता हाई कोर्ट में हुआ, जहां उन्होंने 5 जनवरी 2021 को शपथ ली. 27 अप्रैल 2021 से उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई.

इसके बाद उन्होंने 11 अक्टूबर 2021 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. फरवरी 2023 में उन्हें Supreme Court के जज के रूप में पदोन्नत किया गया.

एसएचके/डीकेपी

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