जावेद अहमद किताब ने जेकेसीए अध्यक्ष का पदभार संभाला, पारदर्शिता का किया वादा

श्रीनगर, 22 मई . जावेद अहमद किताब ने Friday को औपचारिक रूप से जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया. यह कदम Supreme Court में लंबित एक याचिका के वापस लिए जाने और उसके बाद जेकेसीए चुनावों से संबंधित अंतरिम आदेश के रद्द होने के बाद उठाया गया.

यह मामला ‘यूथ क्रिकेट क्लब और अन्य बनाम जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन और अन्य’ नामक केस से संबंधित था, जिसमें Supreme Court द्वारा पहले दिए गए अंतरिम रोक आदेश को 21 मई को याचिकाकर्ताओं द्वारा अपनी याचिका वापस लेने के बाद रद्द कर दिया गया था.

जेकेसीए का पदभार संभालते हुए किताब ने कहा, “चुनाव परिणाम India के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ए.के. ज्योति की देखरेख में घोषित किए गए थे, जो अब प्रभावी हो गए हैं, जिससे चुनी हुई संस्था को एसोसिएशन का आधिकारिक प्रभार संभालने की अनुमति मिल गई है. उनका नया कार्यकाल विकास और ईमानदारी पर केंद्रित होगा.”

एसोसिएशन द्वारा जारी एक बयान में उन्होंने कहा, “यह शासन पारदर्शिता, जवाबदेही और सम्मान पर आधारित होगा. भविष्य के प्रशासनिक कामकाज से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी सभी संबंधित सदस्यों को उचित समय पर दे दी जाएगी.”

किताब ने सभी संबंधित पक्षों को आश्वासन दिया कि एसोसिएशन की नियमावली सभी निर्णयों और गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम करेगी. वह श्रीनगर और जम्मू, दोनों कार्यालयों में उपलब्ध रहेंगे.

एसोसिएशन ने आगे बताया, “इस परिपत्र की प्रतियां बीसीसीआई के पदाधिकारियों, जेकेसीए के पदाधिकारियों, शीर्ष काउंसिल के सदस्यों और एसोसिएशन से जुड़े विभिन्न बैंकिंग संस्थानों को भेज दी गई हैं.”

किताब के अलावा, देश रतन दुबे (उपाध्यक्ष), विवेक खजूरिया (सचिव), राजन सिंह (कोषाध्यक्ष), और एपेक्स काउंसिल के सदस्य अनिल कुमार कौल तथा राकेश कौल ने भी अपना पदभार संभाल लिया है.

जेकेसीए के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा पदभार ग्रहण करना एक लंबे और विवादित प्रशासनिक दौर की समाप्ति का प्रतीक है. यह दौर 2017 में तब शुरू हुआ था, जब जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय ने चुनी हुई संस्था को हटाकर उसकी जगह ‘कोर्ट-नियुक्त प्रशासकों’ (सीएए) की नियुक्ति कर दी थी. इसके तहत, पूर्व Police अधिकारी सैयद आशिक हुसैन बुखारी को एसोसिएशन के मामलों की देखरेख के लिए सीईओ बनाया गया. यह दखल, जिसे शुरू में कुछ समय के लिए माना गया था, लगभग चार साल तक चला, क्योंकि प्रशासक और सीईओ बिना चुनाव कराए ही जेकेसीए चलाते रहे.

मार्च 2021 में, उच्च न्यायालय ने उनका कार्यकाल समाप्त कर दिया और बीसीसीआई को जेकेसीए का प्रबंधन करने तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इसके अनुसार, बीसीसीआई ने एक उप-समिति का गठन किया, जिसमें पूर्व क्रिकेटर मिथुन मन्हास (जो बीसीसीआई के प्रमुख हैं), वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील सेठी और ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता शामिल थे.

इस कदम से लोकतांत्रिक शासन की वापसी की उम्मीदें जगीं, लेकिन चुनावों में बार-बार हो रही देरी के कारण पूरे केंद्र शासित प्रदेश के क्लबों और हितधारकों में निराशा फैल गई. जनवरी 2026 में हुई चुनावी प्रक्रिया से एक नया विवाद खड़ा हो गया, जिसमें कई क्लबों ने मतदाता सूचियों में हेरफेर, मतदान के अधिकारों में बदलाव और प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोप लगाए.

इसके बाद, नाराज क्लबों ने Supreme Court का रुख किया, जिसने चुनावों को आगे बढ़ने की अनुमति तो दी, लेकिन 8 जनवरी को परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी. अब जब याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली है, तो शीर्ष अदालत ने रोक हटा दी. इसके बाद Friday को निर्वाचित निकाय के कार्यभार संभालने का रास्ता साफ हो गया.

पीएके

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