जम्मू-कश्मीर: नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, फारूक अब्दुल्ला ने 52 नेताओं और प्रतिनिधियों को भेजा न्योता

श्रीनगर, 9 जुलाई . जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन New Delhi के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करेगी. पार्टी अध्यक्ष और पूर्व Chief Minister डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने देश के 52 प्रमुख Political नेताओं, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को इस प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है.

डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अपने पत्र में कहा कि वह यह अपील सिर्फ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व सदस्य और सार्वजनिक जीवन के लंबे अनुभव के आधार पर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी Political दलों को एकजुट होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने, जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने और राज्य का दर्जा समाप्त करने का फैसला लिया गया था. उस समय संसद में केंद्र Government ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिया जाएगा. जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इन आश्वासनों पर भरोसा किया और किसी तरह का आंदोलन करने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया. वर्ष 2024 में शांतिपूर्ण ढंग से विधानसभा चुनाव हुए और जनता ने अपना जनादेश दिया. उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में निर्वाचित Government काम कर रही है, लेकिन अब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि यह केवल जम्मू-कश्मीर की भावनाओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि India की संघीय व्यवस्था और संविधान की मूल भावना से जुड़ा विषय है. राज्यों को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि जनता की लोकतांत्रिक इच्छा का प्रतीक माना गया है. ऐसे में राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार हो रही देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. जंतर-मंतर पर होने वाला प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक होगा. इसमें किसी नई मांग को नहीं उठाया जाएगा, बल्कि केवल उसी वादे को पूरा करने की मांग की जाएगी, जो संसद में किया गया था.

डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि संघवाद किसी एक पार्टी, क्षेत्र या समुदाय का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है. उन्होंने नेताओं से इस प्रदर्शन में शामिल होकर जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील की.

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जिन प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया है, उनमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तमिलनाडु के पूर्व Chief Minister एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी, Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, डीपीएपी प्रमुख गुलाम नबी आजाद, सीपीएम महासचिव एमए बेबी, सीपीआई महासचिव डी राजा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, बसपा प्रमुख मायावती, बीजेडी प्रमुख नवीन Patnaयक, वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी, बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव, शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा, सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद यूसुफ तारीगामी, अवामी इत्तेहाद पार्टी के प्रमुख शेख अब्दुल राशिद, मीरवाइज उमर फारूक, जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम समेत कई अन्य Political नेताओं, विधायकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं.

एएमटी/एबीएम

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