दिशा सालियान केस को राजनीतिक रंग न दें, यूसीसी देश के संविधान के खिलाफ: वारिस पठान

Mumbai , 15 सितंबर . एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने दिशा सालियान मामले में सीबीआई की First Information Report , मराठा आरक्षण आंदोलन, Rajasthan निकाय चुनाव में एआईएमआईएम का खाता खुलने, यूपीआई-रुपे भुगतान और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने दिशा सालियान मामले को Political रंग नहीं देने की अपील की और कहा कि सीबीआई की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी. वहीं, यूसीसी का विरोध करते हुए उन्होंने इसे संविधान के विभिन्न प्रावधानों के खिलाफ बताया.

दिशा सालियान मामले में सीबीआई की ओर से First Information Report दर्ज किए जाने पर वारिस पठान ने कहा कि इस मामले को Political मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि एक पिता पिछले छह वर्षों से अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और शुरुआत से ही उसका दावा रहा है कि उसकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी. सतीश सालियान ने हाईकोर्ट का रुख किया था और अदालत के आदेश के बाद सीबीआई जांच शुरू हुई. अब सीबीआई ने उनका बयान दर्ज किया है और शिकायत में जिन लोगों के नाम दिए गए हैं, उनकी भूमिका की जांच एजेंसी करेगी. यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी.

उन्होंने कहा कि सीबीआई को यह भी जांचना होगा कि पहले मामले में क्लोजर रिपोर्ट किस आधार पर दाखिल की गई थी और उस समय किन साक्ष्यों को ध्यान में रखा गया था. गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों की जांच के बाद सीबीआई जब कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट या चार्जशीट रखेगी, तब तस्वीर स्पष्ट होगी. उन्होंने मीडिया ट्रायल और अटकलों से बचने की अपील करते हुए कहा कि इस मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए.

मनोज जरांगे पाटिल द्वारा मराठा आरक्षण की मांग को लेकर Mumbai मार्च की तारीख घोषित किए जाने पर पठान ने कहा कि एआईएमआईएम ने मराठा आरक्षण की मांग का हमेशा समर्थन किया है. मराठा समाज के साथ-साथ धनगर समाज को भी आरक्षण मिलना चाहिए और मुस्लिम समाज के सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने सच्चर कमेटी और अन्य रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुस्लिम समाज के पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की मांग की. पठान ने कहा कि उनकी मांग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि उन पिछड़े परिवारों के लिए है जो अपने बच्चों को शिक्षा दिलाकर आगे बढ़ाना चाहते हैं.

पश्चिम बंगाल में एक महिला आईएएस अधिकारी के कथित रूप से वर्दी में धार्मिक अभिव्यक्ति का इस्तेमाल करने के बाद तबादले के मुद्दे पर पठान ने इसे नफरत की राजनीति बताया. उन्होंने कहा कि ‘अस्सलाम वालेकुम’ और ‘इंशाअल्लाह’ जैसे शब्द धार्मिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां हैं और इनके इस्तेमाल को लेकर आपत्ति क्यों होनी चाहिए. वर्दी किसी व्यक्ति का धर्म नहीं देखती और अधिकारी संविधान के प्रति शपथ लेकर काम करते हैं. जहां ‘जय हिंद’ कहना स्वीकार्य है, वहां किसी व्यक्ति द्वारा अभिवादन के रूप में ‘सलाम’ कहने पर भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए. संविधान नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है. ऐसे फैसले देश के माहौल को खराब करते हैं और Government को सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए.

उमर खालिद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के बयान पर पठान ने कहा कि वह बयान से परिचित नहीं हैं, लेकिन एक वकील के तौर पर उनका मानना है कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बिना मुकदमे के जेल में रखना उचित नहीं है. कानून का मूल सिद्धांत है कि व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक अदालत उसे दोषी साबित न कर दे. उमर खालिद और अन्य लोगों को वर्षों से जेल में रखा गया है, जबकि मुकदमे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है. यदि Government के पास सबूत हैं तो उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाए और मुकदमा चलाया जाए. बिना सुनवाई के लंबे समय तक हिरासत में रखना उनके मुताबिक न्याय के बजाय अन्याय की स्थिति पैदा करता है.

जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर Pakistan द्वारा इनाम घोषित किए जाने पर पठान ने Pakistan पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. उन्होंने पुलवामा, 26/11 और पहलगाम जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि India आतंकवादी गतिविधियों का खामियाजा भुगत चुका है. उन्होंने कहा कि Pakistan द्वारा मसूद अजहर पर इनाम की घोषणा महज दिखावा लगती है. पठान ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर समाप्त किया जाना चाहिए.

दो हजार रुपए तक यूपीआई भुगतान को लेकर प्रस्तावित व्यवस्था पर पठान ने कहा कि Government ने पहले लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत डाली और यूपीआई को सुविधा के रूप में बढ़ावा दिया. अब 2 हजार से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की चर्चा को लेकर उन्होंने Government पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब लोग डिजिटल भुगतान पर निर्भर हो चुके हैं तो बाद में शुल्क लगाने की व्यवस्था आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है. ऐसी नीतियों से लोगों का Government पर भरोसा प्रभावित हो सकता है.

Rajasthan निकाय चुनाव में एआईएमआईएम के दो उम्मीदवारों की जीत पर पठान ने इसे पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार जीते हैं. आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल की पार्टी के साथ गठबंधन के तहत कई जगहों पर पार्टी को सफलता मिली. एआईएमआईएम Rajasthan में अपना Political आधार बढ़ा रही है और आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में भी पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. भविष्य में किस दल के साथ गठबंधन होगा, इसका फैसला उचित समय पर किया जाएगा.

समान नागरिक संहिता पर पठान ने कहा कि India की पहचान उसकी विविधता और बहुलतावादी संस्कृति से है. उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग धर्मों, संस्कृतियों और रीति-रिवाजों वाले समाज को एक ही कानूनी ढांचे में कैसे रखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि यूसीसी संविधान ते तहत दिए गए अधिकारों को प्रभावित कर सकता है. प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए मुस्लिम समुदाय पर एक विशेष धार्मिक कानून थोपने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने अलग-अलग राज्यों में कानूनों और प्रथाओं के अंतर का उदाहरण देते हुए यूसीसी की कथित ‘यूनिफॉर्मिटी’ पर सवाल उठाए. उनकी पार्टी यूसीसी का विरोध करती है और आगे भी इसका विरोध जारी रखेगी. कानून बनाते समय India की बहुलतावादी संरचना और सभी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

पीएसके

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