तीसरी तिमाही में भारत का व्यापार प्रदर्शन मजबूत रहा: नीति आयोग

New Delhi, 20 अप्रैल . नीति आयोग ने Monday को अपनी ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि India का वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (क्यू3) में ट्रेड यानी व्यापार प्रदर्शन मिला-जुला लेकिन मजबूत रहा, जिसमें माल (मर्चेंडाइज) निर्यात में 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि आयात में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में सेवाओं का निर्यात 7.8 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ा, जबकि सेवाओं का आयात अपेक्षाकृत कम रहा, जिसके परिणामस्वरूप एक निरंतर अधिशेष बना रहा और बाहरी संतुलन को सहारा मिला.

इस रिपोर्ट को नीति आयोग की उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने जारी किया, जिसमें अक्टूबर से दिसंबर 2025 की अवधि का विश्लेषण किया गया है.

इस तिमाही में जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर पर खास ध्यान दिया गया है, जो India के श्रम-आधारित मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. कच्चे सोने को छोड़कर इस सेक्टर का वैश्विक बाजार 2024 में करीब 378 अरब डॉलर का आंका गया, जिसमें India का निर्यात 29.5 अरब डॉलर रहा, जो दुनिया के कुल निर्यात का 7.8 प्रतिशत है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेक्टर में India की ताकत हीरे और कीमती धातुओं के आभूषणों में है, जो मिलकर वैश्विक मांग का आधे से ज्यादा हिस्सा यानी करीब 207.3 अरब डॉलर की पूर्ति करते हैं.

इन क्षेत्रों में India की मजबूत मौजूदगी है, जहां 26.7 अरब डॉलर का निर्यात हुआ. यह दिखाता है कि India एक बड़े प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित है, जहां आयातित कच्चे माल में वैल्यू एडिशन करके निर्यात किया जाता है. इस काम में सूरत दुनिया का सबसे बड़ा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र बनकर उभरा है.

हालांकि, नीति आयोग ने इस सेक्टर में कुछ चुनौतियों की भी पहचान की है, जैसे एमएसएमई सेक्टर का बिखरा हुआ ढांचा, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता, फाइनेंस की कमी, स्किल और डिजाइन से जुड़ी समस्याएं और वैश्विक बाजारों से सीमित जुड़ाव.

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि India को लैब-ग्रोन डायमंड जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार करना चाहिए, फाइनेंस और कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ानी चाहिए, टेक्नोलॉजी और स्किल में निवेश करना चाहिए और मजबूत नीतिगत ढांचा तैयार करना चाहिए.

सुमन बेरी ने कहा कि जेम्स और ज्वेलरी जैसे सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए वैश्विक मांग के अनुसार खुद को ढालना, वैल्यू एडिशन बढ़ाना और संरचनात्मक समस्याओं को दूर करना जरूरी है.

विश्लेषण में यह भी बताया गया है कि इस सेक्टर में India का निर्यात कुछ चुनिंदा बाजारों जैसे अमेरिका, यूएई और हांगकांग पर ज्यादा निर्भर है, जबकि कच्चे माल के लिए भी सीमित देशों पर निर्भरता बनी हुई है.

डीबीपी

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