कांग्रेस ने सीएम फडणवीस को महिला आरक्षण पर खुली बहस की चुनौती दी

Mumbai , 20 अप्रैल . लैंगिक प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही Political बहस के बीच कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य और सांसद प्रणीति शिंदे ने Monday को Chief Minister देवेंद्र फडणवीस की उस चुनौती को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पर खुली बहस का प्रस्ताव रखा था. इसके साथ ही शिंदे ने यह भी मांग की कि इस बहस में Prime Minister Narendra Modi को भी शामिल होना चाहिए.

कांग्रेस सांसद शोभा बच्छाव के साथ एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रणीति शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पार्टी आरक्षण के मुद्दे का उपयोग एक छिपे हुए एजेंडे के रूप में कर रही है, जिसका उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है. उनके अनुसार, इससे देश की संघीय व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

शिंदे ने Chief Minister को चुनौती देते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस के लिए समय और स्थान तय करें, ताकि सभी पक्ष अपने विचार खुलकर रख सकें. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि Government द्वारा बुलाया गया विशेष सत्र महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़े फैसलों को आगे बढ़ाने के लिए था.

शिंदे और बच्छाव ने यह भी कहा कि Government की मंशा पर सवाल उठते हैं, क्योंकि प्रस्तावित योजनाओं से उत्तर और दक्षिण India के राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है. उन्होंने मांग की कि Lok Sabha की सभी पांच सौ तैंतालीस सीटों पर तैंतीस प्रतिशत महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए और इसके लिए जनगणना या परिसीमन जैसी किसी शर्त को न जोड़ा जाए.

प्रणीति शिंदे ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में लाया गया महिला आरक्षण विधेयक जानबूझकर जटिल शर्तों के साथ तैयार किया गया था, ताकि इसे लागू करने में देरी हो सके. उन्होंने कहा कि Government ने महिला आरक्षण के नाम पर विशेष सत्र बुलाया था. लेकिन, शुरू में इस विषय को एजेंडे में शामिल ही नहीं किया गया था.

उन्होंने आगे कहा कि Government का असली उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के जरिए Political लाभ हासिल करना था. लेकिन, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रयासों के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी और Government को अपने कदम पीछे लेने पड़े.

शिंदे ने Chief Minister की ‘भ्रूण हत्या’ वाली टिप्पणी का भी उल्लेख किया और इसके बाद उन्होंने भाजपा पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने मणिपुर, हाथरस, उन्नाव और बदलापुर जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये मामले महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पर चिंता पैदा करते हैं. उनके अनुसार, भाजपा सिर्फ Political स्तर पर ही नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर भी सवालों के घेरे में है.

उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं को लेकर Government को और अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है. शिंदे ने आरोप लगाया कि कई मामलों में महिलाओं के साथ अन्याय हुआ है और उन पर उचित कार्रवाई नहीं की गई.

वहीं, कांग्रेस नेता शोभा बच्छाव ने पार्टी के ऐतिहासिक योगदानों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का श्रेय पूर्व Prime Minister राजीव गांधी को जाता है. साथ ही कई राज्यों में इसे बढ़ाकर पचास प्रतिशत तक पहुंचाने का श्रेय सोनिया गांधी को दिया जाता है.

उन्होंने यह भी कहा कि आज स्थानीय निकायों में लगभग पंद्रह लाख महिलाएं कार्य कर रही हैं और यह बदलाव कांग्रेस की नीतियों के कारण संभव हुआ है. बच्छाव के अनुसार, यदि 2024 के चुनावों के लिए प्रस्तावित 2023 का महिला आरक्षण कानून लागू कर दिया गया होता, तो Lok Sabha में लगभग एक सौ अस्सी महिला सांसद होतीं. लेकिन उनके अनुसार, Government ने इस कानून को कुछ शर्तों से जोड़कर इसकी प्रक्रिया को जटिल बना दिया.

शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक संरचना पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अब तक भाजपा में कोई भी महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनी है, जो महिलाओं की भागीदारी पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने भाजपा के प्रस्तावित हस्ताक्षर अभियान को भी आलोचना का विषय बनाते हुए कहा कि यह केवल दिखावा है और इसमें विश्वसनीयता की कमी है.

एमएस/

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