वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के बीच सबसे बड़ा लाभार्थी बन रहा भारत, दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में बना रहा मजबूत जगह: एसोचैम

New Delhi, 7 जुलाई . उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा Tuesday को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, India तेजी से दुनिया के प्रमुख विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. अब दुनिया भर की कंपनियां केवल चीन पर निर्भर रहने के बजाय ‘चीन+1’, नियरशोरिंग और फ्रेंडशोरिंग जैसी रणनीतियां अपना रही हैं, ताकि उनकी सप्लाई चेन अधिक मजबूत और सुरक्षित बन सके.

रिपोर्ट में दुनिया की 10 सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया गया है, जो मिलकर वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिसमें India को महामारी के बाद सबसे तेजी से उभरते हुए विनिर्माण देशों में शामिल बताया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-19 के महामारी-पूर्व दौर में India की औसत विनिर्माण वृद्धि दर 3.44 प्रतिशत थी, जो 2022-25 के दौरान बढ़कर 4.15 प्रतिशत हो गई. इस दौरान India न केवल वैश्विक औसत से ऊपर पहुंचा, बल्कि विश्व औसत से लगभग दो प्रतिशत अंक अधिक प्रदर्शन करने लगा.

महामारी के बाद India उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है. इस सूची में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन भी शामिल हैं. वहीं महामारी से पहले केवल चीन, मेक्सिको और रूस ही वैश्विक औसत से अधिक विनिर्माण वृद्धि दर्ज कर रहे थे.

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है. अब कंपनियां केवल उत्पादन दक्षता पर ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की मजबूती और विविधता पर भी समान रूप से ध्यान दे रही हैं.

उन्होंने कहा कि India के विनिर्माण क्षेत्र में लगातार हो रहे सुधार Government के आर्थिक सुधारों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का परिणाम हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, India की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें मजबूत घरेलू मांग, बेहतर आधारभूत ढांचा, लॉजिस्टिक्स में सुधार, चीन+1 रणनीति के कारण बढ़ता वैश्विक निवेश और Government की विभिन्न योजनाएं शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना, औद्योगिक कॉरिडोर और पीएम गति शक्ति जैसी Governmentी पहलों ने India को वैश्विक विनिर्माण निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

एसोचैम का मानना है कि India यदि लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करे, घरेलू सप्लायर नेटवर्क को विकसित करे, कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को और बेहतर बनाए, इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को बढ़ावा दे और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का प्रभावी उपयोग करे, तो वह वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकता है तथा दुनिया के अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है.

डीबीपी

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