जम्मू-कश्मीर : एनआईए ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े सीमापार आतंकी साजिश मामले में 10 जगहों पर तलाशी ली

श्रीनगर, 12 सितंबर . राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने Saturday को जम्मू-कश्मीर में 10 जगहों पर तलाशी ली. यह कार्रवाई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के Pakistan में बैठे हैंडलर्स और उनके स्थानीय ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ के नेटवर्क से जुड़ी सीमापार आतंकी साजिश के सिलसिले में की गई.

घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को लॉजिस्टिकल और दूसरी मदद देने वाले लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में तलाशी ली गई.

इन छापों के दौरान एनआईए की टीमों को जम्मू-कश्मीर Police और सीआरपीएफ से मदद मिली.

यह मामले में शुरुआत में जकूरा Police स्टेशन में First Information Report दर्ज की गई थी. बाद में एनआईए ने इसे यूए(पी) एक्ट, 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7 और 25, और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत फिर से दर्ज किया.

जांच तब शुरू हुई जब 31 मार्च की देर रात एक चेकपॉइंट पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद हुए.

बाद की जांच में साजिश से जुड़े Pakistanी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और उनकी संदिग्ध भूमिकाओं का पता चला. अब तक की जांच से Pakistan में बैठे लश्कर-ए-तैयबा हैंडलर्स और उनके स्थानीय साथियों के बीच संबंधों का पता चला है.

इन साथियों का इस्तेमाल घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के साथ बातचीत, उनकी आवाजाही, उन्हें छिपाने, पनाह देने, रेकी करने और दूसरी लॉजिस्टिकल मदद देने के लिए किया जा रहा था.

एनआईए पूरे नेटवर्क का पता लगाने और गतिविधियों के दायरे को समझने के लिए फाइनेंशियल ट्रेल, बातचीत के तरीकों, आरोपियों की आवाजाही और हथियारों व विस्फोटकों के सोर्स और सप्लाई चेन की भी जांच कर रही है.

Saturday की गई तलाशी एनआईए की उस जांच का हिस्सा है, जो बड़ी साजिश और सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले सपोर्ट सिस्टम के बारे में चल रही है.

तलाशी के दौरान मामले से जुड़े और भी आपत्तिजनक सामान जब्त किए गए. इनकी जांच की जा रही है और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए दूसरे सबूतों से इनका मिलान किया जा रहा है.

एनआईए साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिकाओं का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए है. जांच के नतीजों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गिरफ्तारी और बरामदगी शामिल हो सकती है.

डीकेएम/एबीएम

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