
New Delhi, 21 अप्रैल . India और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता अतीत में दोनों देशों के बीच Political तनाव के कारण बाधित हुई थी, लेकिन इस साल मार्च में कनाडा के Prime Minister मार्क कार्नी की India यात्रा के दौरान बातचीत फिर शुरू होने से दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध बनाने का नया मौका मिला है. यह बात कनाडा में India के पूर्व उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने कही है.
कनाडा में पूर्व उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने इंडिया नैरिटिव में एक लेख में कहा, “कनाडा एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है. भू-Political अनिश्चितता के इस दौर में उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है, जो अब एक रणनीतिक समस्या बनती जा रही है. ऐसे में कनाडा के लिए अपने व्यापार को विविध बनाना जरूरी हो गया है. इस संदर्भ में India न सिर्फ एक बाजार है, बल्कि एक लंबे समय का रणनीतिक साझेदार भी है.”
उनका मानना है कि 2022 में अर्ली प्रोग्रेस ट्रेड एग्रीमेंट (ईपीटीए) की ओर बढ़ना एक व्यावहारिक कदम था, जिसकी पहले कमी थी. इसी आधार पर आगे चलकर एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) बनाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि सीईपीए को एक बार में पूरा होने वाले समझौते के रूप में नहीं, बल्कि चरणों में आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए. पहले चरण में ईपीटीए के तहत हुई बातचीत को मजबूत किया जा सकता है. इसके बाद निवेश सुरक्षा, डिजिटल व्यापार और नियामक सहयोग जैसे जटिल मुद्दों को धीरे-धीरे शामिल किया जा सकता है. कृषि, बौद्धिक संपदा और Governmentी खरीद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बाद में चर्चा की जा सकती है, जब माहौल अनुकूल हो.
लेख में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार अभी कम है, लेकिन बेहतर बाजार पहुंच और आसान नियमों से इसे बढ़ाया जा सकता है. सेवाओं का व्यापार पहले से मजबूत है और इसे आईटी, शिक्षा और प्रोफेशनल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में और बढ़ाया जा सकता है. कस्टम्स प्रक्रिया को आसान बनाकर व्यापार लागत कम की जा सकती है और प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकता है.
लेख में यह भी बताया गया है कि दोनों देशों के बीच निवेश संबंध पहले से मजबूत हैं. कनाडा के पेंशन फंड और निवेशकों ने India के इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में बड़ा निवेश किया है, जबकि भारतीय कंपनियां कनाडा के सेवा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं. यह निवेश संबंध व्यापार को मजबूत करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं. हालांकि, निवेश को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए टैक्स और धन वापसी से जुड़े नियमों को और स्पष्ट व स्थिर बनाना जरूरी होगा.
पूर्व उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि इस समझौते को Political विवादों से बचाकर रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि पहले भी ऐसे विवादों ने दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया है.
वर्मा ने कहा कि समाधान यह नहीं है कि ऐसे विवाद दोबारा नहीं होंगे, बल्कि ऐसे सिस्टम तैयार किए जाएं जिससे आर्थिक संबंध प्रभावित न हों. एक मजबूत सीईपीए न सिर्फ Political झटकों को सह सकता है, बल्कि ऐसे विवाद पैदा करने की लागत भी बढ़ा देता है.
इसका मतलब है कि मजबूत विवाद समाधान प्रणाली, नियमित समीक्षा प्रक्रिया और ऐसे संस्थागत ढांचे बनाए जाएं जो Political हालात से प्रभावित न हों. साथ ही, निजी क्षेत्र को भी इसमें अधिक भूमिका दी जानी चाहिए, ताकि जब Governmentों के बीच मतभेद हों, तब आर्थिक हितधारक स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकें.
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डीबीपी