Saturday , 19 June 2021

कोरोना से मरने से बचना है तो तेज-तेज चलना होगा

नई दिल्ली (New Delhi) . धीमी गति से चलने वालों को कोरोना से मौत का ज्यादा खतरा होता है. ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है. शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए यूके बायोबैंक (Bank) डाटा का उपयोग किया और कोविड जोखिम के लिए चलने की गति की तुलना की. शोधकर्ताओं ने पाया कि सामान्य वजन वाले लोग अगर धीमी गति से चलते हैं तो उनमें मौत का खतरा बढ़ जाता है. वहीं अधिक वजन और तेज गति से चलने वाले लोगों को कोरोना का कम खतरा होता है. क्योंकि तेज गति से चलने वालों का हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी सिस्टम सही से काम करता है.

एक नए अध्ययन के आधार पर यह चेतावनी जारी की गई है कि जो लोग धीरे-धीरे चलते हैं, उन्हें कोरोना (Corona virus) से मौत का चार गुना (guna) अधिक खतरा होता है. लीसेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 3,12,596 मध्यम आयु वर्ग के यूके बायोबैंक (Bank) प्रतिभागियों के वजन, चलने की गति और कोविड -19 के बीच संबधों का अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि धीरे-धीरे चलने वाले समान्य वजन के लोगों में कोरोना संक्रमित होने की संभावना सामान्य वजन के तेजी से चलने वालों की तुलना में 2.5 गुना (guna) अधिक होती है. वहीं धीमी गति से चलने वाले लोगों की मौत तेज गति से चलने वालों की तुलना में 3.75 गुना (guna) अधिक थी. अध्ययन में एक घंटे में तीन किलोमीटर से कम दूरी चलकर तय करने वालों को स्लो वॉकर माना गया. जबकि एक तेज गति वाले को ऐसे व्यक्ति के रूप में जो प्रति घंटे चार किमी से अधिक दूरी तय किया हो. इसके पूर्व में हुए एक शोध के अनुसार तेज गति से पैदल चलने से हृदय रोग का खतरा 31 प्रतिशत कम हो जाता है.

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा किए गए इस शोध के अनुसार रोजाना तेज गति से चलने वालों की मृत्युदर 32 प्रतिशत तक कम हो जाता है. इस शोध के अनुसार हर घंटे कुछ मिनट ही तेज चाल चलना पूरे दिन में एक घंटा जिम में की गयी मेहनत के बराबर होता है. चिकित्सक भी मानते हैं कि रोजाना 30 मिनट के ब्रिस्क वॉकिंग (तेज गति से पैदल चलने) से 150 कैलोरी बर्न होती है. ऐसे में आप रोजाना वॉकिंग से हफ्ते भर में लगभग एक पाउंड वजन तो कम कर ही सकते हैं.

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