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Sunday, 1 November 2026
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‘संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कानूनी मदद लूंगी’, एशियन गेम्स के स्क्वॉड से बाहर किए जाने पर बोलीं मनिका बत्रा

‘संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कानूनी मदद लूंगी’, एशियन गेम्स के स्क्वॉड से बाहर किए जाने पर बोलीं मनिका बत्रा

New Delhi, 24 जून . एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिलने के बाद India की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा चर्चा में हैं. मनिका ने हाल ही में टीम से बाहर किए जाने पर सवाल उठाए थे और इस मामले में Prime Minister Narendra Modi से हस्तक्षेप की अपील भी की थी. अब उन्होंने उन आरोपों का जवाब दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि वह टीम में शामिल किए जाने या अपने लिए विशेष व्यवस्था की मांग कर रही हैं.

मनिका ने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष सुविधा या रियायत की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहती हैं. उन्होंने टीम से बाहर किए जाने के फैसले को मनमाना बताते हुए Prime Minister Narendra Modi और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की अपील की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकती हैं.

मनिका ने एक बयान में कहा, “पिछले दो दशकों से मुझे सर्वोच्च स्तर पर India का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. अपने पूरे करियर में मैंने जीत, हार, चयन और चयन न होने, सभी परिस्थितियों को स्वीकार किया है. यह खेल का हिस्सा है. लेकिन जिस बात को स्वीकार करना मुश्किल है, वह है पारदर्शिता की कमी और मनमानी.”

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में मैंने कई लोगों को यह कहते हुए देखा है कि मैं एशियन गेम्स टीम में जगह चाहती हूं या विशेष विचार की मांग कर रही हूं. मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि मैं चयन की मांग नहीं कर रही हूं और न ही किसी से फैसला बदलने को कह रही हूं. मैं सिर्फ जवाब मांग रही हूं. मुझे यह नहीं बताया गया कि मेरा चयन क्यों नहीं किया गया. यदि मुझे इस फैसले के आधार के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो मेरे पास कानूनी विकल्प अपनाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. मैं यह इसलिए नहीं कर रही हूं कि मुझे टीम में जगह या कोई विशेष व्यवस्था चाहिए, बल्कि इसलिए कि मेरा मानना है कि हर खिलाड़ी को चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निरंतरता और जवाबदेही मिलनी चाहिए.”

मनिका ने कहा कि वह करीब 20 वर्षों से India का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और केवल एक स्पष्ट तथा ईमानदार जवाब चाहती हैं. उन्होंने अपनी मौजूदा विश्व रैंकिंग का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब वह विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर हैं और शीर्ष-50 से मामूली अंतर से बाहर हैं, तो उन्हें चयन के योग्य क्यों नहीं माना गया.

उन्होंने कहा कि टेबल टेनिस की विश्व रैंकिंग हर सप्ताह बदलती रहती है और यह अंक प्रणाली पर आधारित होती है. ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि खिलाड़ियों का मूल्यांकन किस अवधि की रैंकिंग के आधार पर किया गया. उन्होंने पूछा, “क्या चयन पिछले 12 महीनों, छह महीनों, दो महीनों या किसी एक सप्ताह की रैंकिंग के आधार पर किया गया? यदि कोई खिलाड़ी लंबे समय तक शीर्ष-50 के आसपास बना रहता है और किसी सप्ताह उसकी रैंकिंग 50 से 51 हो जाती है, तो क्या वह अचानक चयन के लिए अयोग्य हो जाता है?”

मनिका ने कहा कि चयन प्रक्रिया में केवल रैंकिंग ही नहीं, बल्कि खिलाड़ी के हालिया प्रदर्शन और मौजूदा फॉर्म को भी महत्व दिया जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि इस सत्र में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है और उन्होंने कई शीर्ष एशियाई तथा मजबूत चीनी खिलाड़ियों को हराया है. उन्होंने कहा कि युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भी एशियाई खेलों के लिए खिलाड़ियों के चयन में मौजूदा फॉर्म को महत्वपूर्ण मानता है.

उन्होंने हांगझोउ एशियाई खेलों में India के लिए ऐतिहासिक महिला युगल कांस्य पदक जीतने वाली अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उनके अनुसार, ऐसे खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि चयन संबंधी फैसले किन आधारों पर लिए गए.

मनिका ने उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई, जिनमें कहा गया था कि अंतिम सिलेक्शन वोटिंग के आधार पर किया गया. मनिका ने पूछा कि अगर ऐसा हुआ है तो खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि फैसले किसने और किन कारणों से लिए. उन्होंने कहा कि सिलेक्शन प्रोसेस पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और हितों के टकराव जैसी संभावनाओं की भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए.

मनिका ने सवाल उठाया कि क्या वोटिंग आधारित प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष हो सकती है या उस पर व्यक्तिगत राय और पूर्वाग्रह का असर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी पूछा कि चयन समिति के कितने सदस्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर India का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और उनके पास क्या अनुभव है. उन्होंने कहा, “अगर मेरे खिलाफ वोटिंग हुई है तो उसके पीछे क्या कारण थे? क्या फैसला खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर लिया गया था या व्यक्तिगत राय के आधार पर? इन सवालों के जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आने चाहिए.”

मनिका ने कहा कि उनकी चिंता केवल अपने सिलेक्शन को लेकर नहीं है, बल्कि पूरे सिलेक्शन प्रोसेस में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने को लेकर है. उन्होंने कहा कि वह करीब 20 साल से India का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और किसी एक फैसले पर भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दे रहीं, बल्कि प्रोसेस को स्पष्ट करने की मांग कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि उन्हें इस फैसले के पीछे के कारणों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो वह कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेंगी.

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एसएम/एएस

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