मैं शशि थरूर के विश्लेषण का समर्थन नहीं करता: मनोज झा

New Delhi, 19 मार्च . कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर Government की चुप्पी का पक्ष लेते हुए कहा कि इसे नैतिक हार से जोड़कर देखना उचित नहीं रहेगा. यह एक तरह का समझदारी भरा कदम है. इस पर राजद सांसद मनोज झा ने प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने Thursday को समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि मैं शशि थरूर की प्रतिभा का समर्थन करता हूं, लेकिन उन्होंने जिस तरह का विश्लेषण किया है, उसका समर्थन नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि जब हम आजाद हुए थे, हमारे पास संसाधन नहीं थे. हमारी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी थी. उस वक्त भी हमने संतुलन साधने की दिशा में असमंजस की स्थिति का पालन नहीं किया, बल्कि हमने अपनी राय को बिल्कुल स्पष्ट किया था, तो कुल मिलाकर मैं शशि थरूर के इस राय से बिल्कुल भी इत्तेफाक नहीं रखता हूं. इस पर मैं पहले भी कई मर्तबा लिख चुका हूं.

इसके अलावा, उन्होंने पूर्व राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अभी तो जातिगत जनगणना होगी, तभी जाकर पूरी तस्वीर साफ होगी. इसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा. ये लोग तो बिना जातिगत जनगणना के ही रोहिणी कमीशन को लेकर आ गए. शुक्र है कि अभी इन लोगों ने इस कमीशन को पीछे रखा हुआ है. कुल मिलाकर, मेरा कहना यही है कि एक प्रक्रिया होती है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए.

वहीं, Supreme Court ने ईडी की कार्रवाई पर पश्चिम बंगाल की Chief Minister ममता बनर्जी के हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई है. इस पर राजद नेता ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अब मैं इस पूरे मामले पर क्या ही टिप्पणी कर सकता हूं. निसंदेह इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि मौजूदा समय में Supreme Court के सामने एक या दो नहीं, बल्कि कई तरह की चुनौतियां हैं. लेकिन, हाल ही में एक ऐसी टिप्पणी आई है, जो कि मौजूदा समय में कई लोगों को व्यापक स्तर पर असहज करती हुई आ रही है.

उन्होंने कहा कि मैं कुल मिलाकर यही चाहूंगा कि सभी संस्थानों में मौलिक निरंतरता बनी रहे. ईडी के संबंध में Supreme Court की पहले की कई टिप्पणियां यह बताती हैं कि कैसे ईडी एक Political औजार बन जाता है. ऐसी स्थिति में अगर उस पहलू को भी सामने रखा जाता है, तो यह सभी के लिए उचित रहता.

एमएस/

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