
पेरिस, 1 अगस्त . बांग्लादेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शैक्षणिक स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने ढाका विश्वविद्यालय सिंडिकेट के उस फैसले की कड़ी निंदा की है, जिसके तहत तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया और चार अन्य को उनकी शैक्षणिक तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों से हटा दिया गया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन शिक्षकों पर ‘जुलाई जनअभ्युत्थान की भावना के खिलाफ गतिविधियां’, Government विरोधी प्रचार और एक प्रतिबंधित संगठन का समर्थन करने जैसे आरोप हैं.
इस पर फ्रांस स्थित मानवाधिकार संगठन ‘जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने कहा कि ये कार्रवाई शिक्षकों के असली या माने गए Political विचारों और असहमति वाली राय की वजह से की गई है.
जेएमबीएफ ने कहा कि इस तरह के कदम सिर्फ प्रभावित शिक्षकों के व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन नहीं, बल्कि यह यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है.
संगठन ने बयान में कहा, “किसी लोकतांत्रिक समाज में विश्वविद्यालयों को Political एकरूपता थोपने का औजार नहीं बनना चाहिए. उन्हें स्वतंत्र सोच, शोध, सवाल पूछने और विचारों के खुले आदान-प्रदान के लिए सुरक्षित जगह होना चाहिए. अगर शिक्षकों को उनके Political विचारों या शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति की आजादी इस्तेमाल करने पर सजा दी जाएगी, तो डर का माहौल बनेगा. इससे पढ़ाई और शोध प्रभावित होगा और उच्च शिक्षा की अंतरराष्ट्रीय साख भी खराब होगी.”
जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहानुर इस्लाम ने गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा, “अगर किसी शिक्षक पर गंभीर आरोप हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और कानून के तहत समाधान निकाला जाना चाहिए, लेकिन सिर्फ Political मान्यताओं या शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के कारण शिक्षकों को निशाना बनाना मानवाधिकार, शैक्षणिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.”
उन्होंने बांग्लादेश Government से अपील की कि विश्वविद्यालयों में Political दखल बंद किया जाए. साथ ही संविधान, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और बांग्लादेश की कानूनी जिम्मेदारियों के अनुसार सभी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के बुनियादी अधिकार और शैक्षणिक स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए.
जेएमबीएफ ने संयुक्त राष्ट्र के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार पर विशेष प्रतिवेदकों, यूरोपीय संघ, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्क और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से इस मामले पर नजर रखने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार कदम उठाने का आग्रह किया.
संगठन ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की असली ताकत Political एकरूपता में नहीं, बल्कि स्वतंत्र सोच, आलोचनात्मक शोध, विचारों की विविधता और खुली बहस में है. उच्च शिक्षा में Political बदले की भावना, वैचारिक भेदभाव और असहमति को दबाने की कोई जगह नहीं है. ऐसा करके कोई भी यूनिवर्सिटी शिक्षा की अंतरराष्ट्रीय ऊंचाई हासिल नहीं कर सकती.
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वीकेयू/वीसी