
Patna, 5 अक्टूबर . राष्ट्रीय जनता दल के नेता शक्ति सिंह यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों को लेकर India के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि कि जिस आयोग पर देश में निष्पक्ष चुनाव कराने की बड़ी जिम्मेदारी है, वह अपने कर्तव्य से भटक गया है और वह भाजपा के अधीन होकर कार्य कर रहा है.
उन्होंने कहा कि यह प्रमाणित हो चुका है कि चुनाव आयुक्त ने भारतीय जनता पार्टी के लिए काम किया. केरल के पूर्व मुख्य सचिव ने खुद कहा है कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें टिकट देने का प्रस्ताव रखा था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा के टिकट वितरण में भी उनकी भूमिका रही है.
शक्ति यादव ने बिहार चुनाव में एसआईआर की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इससे जुड़े प्रमाण उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं. इस बीच एक और सच्चाई सामने आ गई है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसले पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता, सभी बराबर होते हैं लेकिन एक आयुक्त द्वारा अन्य आयुक्तों को नजरअंदाज कर मनमानी करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.
उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को नैतिकता के आधार पर तत्काल अपने पद से हट जाना चाहिए. उन्होंने केंद्र Government द्वारा बनाए गए नए कानून पर भी सवाल उठाया और कहा कि ऐसा कानून बनाया गया है कि पद से हटने के बाद भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने कहा कि Prime Minister और President पर पद से हटने के बाद कार्रवाई हो सकती है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्यों नहीं. संवैधानिक संस्थाओं को बचाने और लोकतंत्र को स्वस्थ रखने के लिए ऐसे लोगों से न सिर्फ इस्तीफा लेना चाहिए बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए.
दूसरी तरफ नागपुर में एनसीपी (एसपी) के नेता अनिल देशमुख ने भी चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. अनिल देशमुख ने कहा कि आज चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के हाथों की कठपुतली बन गया है. आयोग के माध्यम से देशभर में मतदाताओं के नाम काटने की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने आंकड़े बताते हुए कहा कि पूरे देश में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं जबकि अकेले Maharashtra में 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं.
देशमुख ने कहा कि यदि जिन लोगों की मृत्यु हो गई है या जो गांव छोड़कर चले गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं तो वह समझा जा सकता है, लेकिन जिन लोगों ने पिछले चुनाव में मतदान किया था, उनके नाम भी काटे जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है. इस तरह से चुनाव आयोग लोगों के संवैधानिक अधिकारों को छीन रहा है.
इस दौरान उन्होंने तीन बड़ी मांगें रखीं. पहली, केंद्र Government को चुनाव आयोग से जल्द से जल्द जवाब मांगना चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना चाहिए. दूसरी, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ First Information Report दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए. तीसरी और सबसे अहम मांग यह है कि देश में अगला जो भी चुनाव हो, वह बैलेट पेपर से ही कराया जाना चाहिए, ताकि लोकतंत्र की निष्पक्षता बनी रहे.
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