सीएम मोहन यादव के ‘लाड़ली बहना बोझ’ वाले बयान पर उमंग सिंघार बोले- बहनें बोझ नहीं सम्मान होती हैं

New Delhi, 6 अक्टूबर . Bhopal में लाड़ली बहना योजना और युवा सम्मेलन में हुए हंगामे को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. Madhya Pradesh में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने Chief Minister मोहन यादव के बयान को बहनों का अपमान बताते हुए भाजपा Government पर युवाओं की अनदेखी और रोजगार के मुद्दे पर तीखा हमला बोला है.

विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा, “Chief Minister मोहन यादव जब चुनाव लड़े थे, तब तो लाड़ली बहना का बहुत प्रचार किया था, भाजपा ने प्रचार किया था और चुनाव में लाड़ली बहना आई थी, आज आप परेशानी बोल रहे हैं. Madhya Pradesh के अंदर उनको परेशानी हो गई. Chief Minister जी, बहनें कभी परेशान नहीं करती हैं, भाइयों का प्यार होती हैं, सम्मान होती हैं.”

उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि उनके सम्मान के लिए, लाड़ली बहना के बारे में आपके क्या विचार हैं, यह आपके मन की बात है जो जुबान पर आ गई है. लगता है लाड़ली बहना उनको बोझ लग रही है.

सीएम मोहन यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि Chief Minister और केंद्र व मध्यप्रदेश की भाजपा Government युवाओं से पूरी तरह घबरा गई है. राहुल गांधी इंदौर आए, जिस प्रकार से युवाओं ने जोश दिखाया, उससे Government में घबराहट है. उसी तर्ज पर आपने कार्यक्रम करना चाहा, लेकिन Chief Minister जी आप कुर्सी पर बैठे हैं, विपक्ष का काम है जनता की आवाज को बुलंद करना. युवाओं का अधिकार है कि उन्हें नौकरियां मिलें, बेरोजगार पोर्टल पर 22 लाख रजिस्टर्ड बेरोजगार क्यों हैं, यह बताएं.

उमंग सिंघार ने कहा कि उन्हें क्या नौकरी देंगे? आप 2027 को युवा वर्ष के रूप में मना रहे हैं, क्या 22 लाख युवाओं को नौकरी मिलेगी? यह मेरा सवाल है, इसका जवाब मिलना चाहिए. युवा अपनी मन की बात बताना चाहते हैं, लेकिन आप उनकी बात सुनना ही नहीं चाहते. आपने एमपीपीएससी की परीक्षा साल में दो बार कराने की बात कही है, हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन एमपीपीएससी की जिन परीक्षाओं के परिणाम रुके हुए हैं, क्या उन्हें आप 24 घंटे या 48 घंटे में जारी करवाएंगे? Chief Minister इसका जवाब दें.

उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के 13 प्रतिशत आरक्षण पर जो होल्ड लगा है, क्या आप Supreme Court में केस वापस लेंगे, ताकि पिछड़ा वर्ग के युवाओं को रुका हुआ 13 प्रतिशत का परिणाम और उनका अधिकार मिल सके? इस पर उन्होंने कोई बात नहीं कही. वह अपनी बात कहना चाहते हैं, लेकिन प्रदेश के युवाओं की बात सुनना नहीं चाहते. जिस तरह से लाल परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में कुर्सियां चलीं, कुर्सियां फेंकी गईं, ध्यान रखिए आज युवा कुर्सी फेंक रहा है, एक दिन आपकी कुर्सी भी इस प्रदेश से फेंक सकता है.

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मैं Chief Minister से कहना चाहता हूं कि यदि एक शिक्षक ने स्कूल का जीर्णोद्धार कर उसे बेहतर बनाया और समाज में अच्छा संदेश दिया, तो उसे पुरस्कृत करने के बजाय आपका शिक्षा विभाग उसे नोटिस दे रहा है कि आपने यह स्कूल कैसे बना दिया. मैं समझता हूं कि Chief Minister जी को बद्री राठौर को बुलाकर सम्मानित करना चाहिए.

उमंग सिंघार ने कहा कि उन्होंने प्रदेश में जो पहल की है, जो नई शुरुआत की है, वह कई सामाजिक संस्थाएं भी कर सकती हैं. क्या Government इस तरह की पहल को बढ़ावा देगी, क्योंकि Governmentी सिस्टम तो फेल हो चुका है. यदि कोई शिक्षक अपने स्कूल और अपने गांव के भले के लिए काम कर रहा है, तो उसे करने दीजिए, उसे नोटिस मत दीजिए.

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केके/वीसी

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