
नई दिल्ली, 18 मई . Prime Minister Narendra Modi और पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया की मौजूदगी में रवींद्रनाथ टैगोर और भारत-स्वीडन के बीच के गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्तों की याद में खास तोहफो का आदान-प्रदान किया.
India के Prime Minister और स्वीडन के पीएम ने रवींद्रनाथ टैगोर की साझा सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हुए विशेष उपहारों का आदान-प्रदान किया.
स्वीडन के Prime Minister उल्फ क्रिस्टेरसन और Prime Minister Narendra Modi ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को सम्मान देने के लिए एक-दूसरे को स्मृति-उपहार दिए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “Prime Minister Narendra Modi और पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन, स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया की मौजूदगी में, रवींद्रनाथ टैगोर और भारत-स्वीडन के बीच के गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्तों की याद में खास तोहफ़ों का आदान-प्रदान किया.”
स्वीडन के Prime Minister की ओर से दिए गए उपहार में एक बॉक्स था, जिसमें टैगोर की लिखी हुई दो छोटी ‘सूक्ति की प्रतियां’ थीं. इसके साथ एक छोटा सा विवरण और 1921 में स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान ली गई टैगोर की एक तस्वीर भी शामिल थी. ये मूल दस्तावेज हाल ही में स्वीडन के राष्ट्रीय अभिलेखागार में मिले हैं, जो टैगोर ने 1921 और 1926 में स्वीडन यात्रा के दौरान लिखे थे.
वहीं Prime Minister मोदी ने स्वीडन के Prime Minister को टैगोर की रचनाओं का एक संग्रह भेंट किया, साथ ही शांतिनिकेतन से एक खास हस्तनिर्मित बैग भी दिया. इस बैग में ऐसे डिज़ाइन हैं जिन्हें खुद टैगोर ने स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए चुना था. यह बैग इस बात का प्रतीक है कि कला सिर्फ संग्रहालयों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बननी चाहिए.
हालांकि गुरुदेव टैगोर 1913 में नोबेल पुरस्कार लेने स्वीडन नहीं जा सके थे, लेकिन 1921 में जब वे स्वीडन गए थे, तब राजा गुस्ताव पंचम ने उनका स्वागत किया था. ये उपहार India और स्वीडन के बीच गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्तों को दर्शाते हैं और टैगोर की स्थायी विरासत को सम्मान देते हैं. यह आदान-प्रदान उनके 1926 के ऐतिहासिक स्वीडन दौरे की 100वीं वर्षगांठ के अवसर से भी जुड़ा है.
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एवाई/एमएस