
शिमला, 28 अप्रैल . Himachal Pradesh हाईकोर्ट ने कथित ब्लैकमेल और आपराधिक साजिश से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महिला आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए उना की निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को बरकरार रखा और स्पष्ट किया कि इस मामले का ट्रायल उना की अदालत में ही जारी रहेगा.
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने 27 अप्रैल 2026 को सुनाए गए अपने फैसले में कुलजीत कौर उर्फ शालू की याचिका को खारिज कर दिया. याचिका में आरोपी ने उना की निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती देते हुए उन्हें निरस्त करने की मांग की थी.
जानकारी के अनुसार, 2020 में उना जिले के चिंतपूर्णी थाना क्षेत्र में दर्ज First Information Report में गंभीर आरोप लगाए गए थे. शिकायत के मुताबिक मुख्य आरोपी नरेंद्र कुमार ने एक महिला के साथ दुष्कर्म किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों व वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल कर भारी रकम वसूली. आरोप यह भी है कि Haryana के कुरुक्षेत्र में जिम ट्रेनर के रूप में कार्यरत कुलजीत कौर ने इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी का साथ दिया और आपराधिक साजिश में शामिल रही.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि कथित अपराध कुरुक्षेत्र (Haryana) में हुआ, इसलिए Himachal Pradesh की अदालत को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है. साथ ही उन्होंने खुद को झूठा फंसाए जाने का भी दावा किया. वहीं, राज्य Government और पीड़िता की ओर से इस दलील का कड़ा विरोध किया गया. उनका कहना था कि अपराध की कड़ियां अलग-अलग स्थानों से जुड़ी हैं और ब्लैकमेल के जरिए वसूली गई रकम Himachal Pradesh में प्राप्त हुई, जिससे यहां की अदालत का अधिकार क्षेत्र बनता है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य, विशेषकर पीड़िता के बयान और बैंक लेन-देन, यह संकेत देते हैं कि अपराध कई चरणों में अलग-अलग स्थानों पर अंजाम दिया गया. ऐसे मामलों में किसी भी एक संबंधित स्थान की अदालत को सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही दुष्कर्म की घटना Haryana में हुई हो, लेकिन ब्लैकमेल और धन वसूली का हिस्सा Himachal Pradesh से जुड़ा हुआ है, जिससे उना की अदालत का अधिकार क्षेत्र स्थापित होता है.
फैसले में यह भी कहा गया कि पीड़िता के बयान में कुलजीत कौर की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है और प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ आरोप बनते हैं. निचली अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-बी, 384 और 506 के तहत आरोप तय करना सही पाया गया है. अदालत ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है और ट्रायल उना की निचली अदालत में ही जारी रहेगा.
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पीएसके