हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई छापेमारी से जुड़ी याचिका पर बंगाल पुलिस से जवाब मांगा

कोलकाता, 29 जून . कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने Monday को पश्चिम बंगाल Police को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के अंदर एक हलफनामा दाखिल करें. यह मामला इस महीने की शुरुआत में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट रोड पर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के Lok Sabha सदस्य अभिषेक बनर्जी के घर पर सुबह-सुबह की गई छापेमारी और तलाशी की कार्रवाई को चुनौती देने से जुड़ा है.

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने राज्य Police को यह भी निर्देश दिया कि वे रेड और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई बातचीत के सभी cctv फुटेज और ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें.

साथ ही, सिंगल बेंच ने मामले में याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि राज्य Police के कोर्ट में अपना हलफनामा जमा करने के दो हफ्ते के भीतर वे अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करें.

बता दें कि वेस्ट मिदनापुर जिला Police के तहत सालबोनी Police स्टेशन, सेंट्रल आर्म्ड Police फोर्सेज (सीएपीएफ) और कोलकाता Police की एक संयुक्त टीम ने 13 जून को सुबह 3 बजे उनके एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय की तलाश में रेड और सर्च ऑपरेशन चलाया था, जो अभी फरार है.

कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके सुबह-सुबह किए गए रेड और सर्च ऑपरेशन को चुनौती दी गई और राज्य Police पर इस मामले में ज्यादती करने का आरोप लगाया गया. इस मामले की सुनवाई Monday को हुई.

अभिषेक बनर्जी (जो पश्चिम बंगाल की पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं) की ओर से बहस करते हुए उनके वकील और पश्चिम बंगाल के पूर्व एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने कहा कि उनके क्लाइंट के घर पर रेड और सर्च ऑपरेशन एक ऐसी शिकायत के आधार पर किया गया था, जिसमें अभिषेक बनर्जी का नाम शामिल नहीं था.

दत्ता ने दलील देते हुए कहा, “शिकायत में सुमित रॉय का नाम था. क्लाइंट के घर पर रेड और सर्च ऑपरेशन सुबह-सुबह सिर्फ इस शक के आधार पर किया गया कि सुमित रॉय वहां मौजूद हो सकते हैं. Police टीम सुबह 3 बजे मेरे क्लाइंट के घर पहुंची और आखिरकार राज्य आपदा प्रबंधन कर्मियों की मदद से मेन गेट का ताला तोड़ दिया.”

जब जस्टिस भट्टाचार्य ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता के वकील रेड और सर्च ऑपरेशन पर ही आपत्ति जता रहे हैं तो उन्होंने कहा कि आपत्ति Police की कथित ज्यादती पर थी, क्योंकि सर्च ऑपरेशन बिना सर्च वारंट के किया गया था.

उन्होंने राज्य Police पर अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया.

राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने अपने जवाबी तर्क में कहा कि सर्च ऑपरेशन इसलिए किया गया क्योंकि आशंका थी कि सुमित रॉय भागने की कोशिश कर सकते हैं. सुनवाई के आखिर में जस्टिस भट्टाचार्य ने राज्य Police को इस मामले में चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को भी Police का हलफनामा जमा होने के दो हफ्ते बाद जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.

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एससीएच/डीकेपी

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