
चंडीगढ़, 12 मार्च . शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने Thursday को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) से अपील की कि वह भगवंत मान द्वारा महिलाओं के बारे में की गई कथित ‘महिला विरोधी और अपमानजनक’ टिप्पणियों का संज्ञान ले.
कमीशन की चेयरपर्सन को दिए अपने प्रतिनिधित्व में हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि Chief Minister भगवंत मान ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना में छात्रों को संबोधित करते हुए अपने कॉलेज के दिनों के कुछ किस्से सुनाए थे.
उनके अनुसार, मान ने बताया कि वह महिलाओं को उनके सूट के रंग के आधार पर ‘पीली ततैया’ या ‘Pakistan का झंडा’ कहकर बुलाते थे. उन्होंने यह भी कहा कि मान ने अपने दोस्तों से मजाक में यह दावा किया था कि एक लड़की उनके साथ रिश्ते में है.
हरसिमरत बादल ने आगे कहा कि इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि जिन लड़कियों ने कॉलेज के समय उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, उनमें से एक को उसी कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में उनका स्वागत करने के लिए कहा गया, जहां वह पहले पढ़ते थे और बाद में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे.
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में इस तरह की बातें शैक्षणिक समुदाय के सामने बताना महिलाओं की गरिमा को कम करने जैसा है. उनके अनुसार, इससे ऐसा संदेश जाता है कि “गुंडागर्दी, छेड़छाड़ और महिलाओं को वस्तु की तरह देखने” जैसी मानसिकता को बढ़ावा मिल सकता है.
हरसिमरत बादल ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति और एक राज्य के Chief Minister के लिए इस तरह की बातें करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि जब ऐसी टिप्पणियां प्रभावशाली छात्रों के सामने की जाती हैं, तो इससे यह खतरनाक संदेश जा सकता है कि महिलाओं की इज्जत को कम करके आंका जा सकता है और मनोरंजन के लिए उनकी पहचान को सिर्फ उनके बाहरी रूप तक सीमित किया जा सकता है.
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दर्ज किया जा सकता है. उनके अनुसार, इसमें यौन उत्पीड़न (सेक्शन 74), महिला की इज्जत का अपमान (सेक्शन 79) और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले काम (सेक्शन 75) से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बातें संविधान के भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 और भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 के भी खिलाफ हैं. ये अनुच्छेद कानून के सामने समानता, लिंग के आधार पर भेदभाव पर रोक और हर नागरिक की गरिमा व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करते हैं.
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बातचीत में महिलाओं की गरिमा और सम्मान से किसी भी हालत में समझौता नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब ऐसी बातें उन लोगों की ओर से कही जाएं जिन्हें शासन और नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई हो.
उन्होंने आगे कहा, “मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले को गंभीरता से लेगा और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा.”
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एमएस/