
New Delhi, 20 अप्रैल . ईरान के President मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरानी जनता दबाव या जोर-जबरदस्ती के आगे झुकने वाली नहीं है. अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए किसी भी सार्थक बातचीत की नींव वादों को निभाने पर टिकी होती है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, ”वादे निभाना ही सार्थक बातचीत का आधार है. अमेरिकी Government के रवैये को लेकर ईरान में गहरा ऐतिहासिक अविश्वास अब भी बना हुआ है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों से मिलने वाले गैर-रचनात्मक और विरोधाभासी संकेत एक कड़वा संदेश देते हैं, कि वे ईरान का समर्पण चाहते हैं. ईरानी लोग जोर-जबरदस्ती के आगे नहीं झुकते.”
वहीं, ईरान की Governmentी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत से किसी अच्छे नतीजे की उम्मीद बहुत कम है. इसलिए ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया है.
एजेंसी ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने अंग्रेजी अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा कि वार्ता के दूसरे दौर से ईरान की अनुपस्थिति का कारण अमेरिका की “बहुत ज्यादा मांगें, अव्यवहारिक उम्मीदें, बार-बार अपने रुख में बदलाव, विरोधाभासी बयान और समुद्री नाकाबंदी” हैं. ईरान का मानना है कि यह नाकाबंदी युद्धविराम का उल्लंघन है.
वहीं, तेहरान में साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक हमने अगले दौर की बातचीत को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है.
प्रवक्ता ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन एक तरफ कूटनीति की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ उसके कदम उससे मेल नहीं खाते. युद्धविराम की शुरुआत से ही ईरान को अमेरिका की तरफ से खराब नीयत और लगातार शिकायतों का सामना करना पड़ा है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुरुआत में अमेरिका कह रहा था कि लेबनान युद्धविराम का हिस्सा नहीं है, जबकि दूसरी तरफ इसके उलट दावे किए जा रहे थे.
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बघाई ने कहा कि समझौता होने के बाद भी ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों में गतिरोध का सामना करना पड़ा. इसमें Sunday रात एक ईरानी व्यापारिक जहाज पर अमेरिका का हमला भी शामिल है, जिसे उन्होंने युद्धविराम का उल्लंघन और आक्रामक कदम बताया.
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एवाई/डीकेपी