पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इको-मरीन टूरिज्म, आइलैंड डेवलपमेंट पर भी गुजरात सरकार का विशेष जोर

गांधी नगर, 30 जून . धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन में अपनी अलग पहचान कायम करने वाला Gujarat देश-दुनिया में विशाल समुद्र तट, समृद्ध जैव विविधता, वन्यजीव अभ्यारणों और अनूठे द्वीपों के लिए भी जाना जाता है. यही वजह है कि Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में Gujarat Government राज्य में इको-टूरिज्म, मरीन टूरिज्म और आइलैंड डेवलपमेंट पर विशेष जोर दे रही है. Government ने राज्य के कोस्टलाइन एरिया और नेचुरल एसेट्स को ग्लोबल टूरिज्म हब के तौर पर डेवलप करने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है.

अगर मरीन टूरिज्म की बात की जाए, तो कच्छ से वलसाड तक लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा वाले Gujarat में अपार संभावनाएं हैं. इसी कारण Government ने कच्छ, द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और सौराष्ट्र के कई तटीय क्षेत्रों को नए पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.

पर्यटन विभाग के मुताबिक, इसके तहत बेट द्वारका में डॉल्फिन इको-टूरिज्म, ओखामढ़ी में टर्टल टूरिज्म, साथ ही नरारा और पिरोटन में मरीन टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा.

वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि जामनगर और द्वारका इलाके में करीब 22 आइलैंड हैं. हमने पिरोटन समेत मरीन नेशनल पार्क का विकास करने के लिए इको-टूरिज्म साइट के तौर पर डेवलप करने का फैसला लिया है. इस कोस्ट पर लगभग 680 डॉल्फिन हैं, जो पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण हो सकता है. सौराष्ट्र में तीन जगहों पर जहां समुद्री कछुए हैं, वहां मरीन टर्टल ब्रीडिंग सेंटर बनाया गया है. गिर सेंचुरी है, जहां शेरों का निवास है, जिनका दूसरा निवास स्थान बरडा वन्य अभयारण्य है.

Government की सौराष्ट्र के माधवपुर, नवदरा, घोघा और जाफराबाद जैसे खूबसूरत तटीय इलाकों को भी टूरिज्म मैप पर लाने की तैयारी है. मरीन टूरिज्म के विकास से जुड़ी परियोजनाओं से राज्य में न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं.

द्वारका के होटल व्यवसायी निर्मल सामानी ने बताया कि कोविड के बाद धार्मिक टूरिज्म में द्वारका ने बहुत तरक्की की है और लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करने लगा है. Government की पहल के साथ-साथ यहां मरीन टूरिज्म और इको-टूरिज्म भी है. ओखा के तटीय इलाके में दिखने वाली डॉल्फिन, पोषितारा इलाके में दिखने वाला समुद्री जीवन और एडवेंचर टूरिज्म जो वॉटर स्पोर्ट्स के तौर पर बहुत अलग तरीके से बढ़ रहा है. इससे रोजगार के बहुत सारे मौके सामने आए हैं. यहां सभी लोगों के लिए रोजगार के मौके दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं.

Gujarat Government मरीन टूरिज्म की तरह ही इको-टूरिज्म के विकास में भी जुटी है. पंचमहल जिले के जंबूघोड़ा अभयारण्य में स्थित भाट और धनपुरी इको-टूरिज्म सेंटर बेहतरीन उदाहरण हैं. घने जंगलों, प्राकृतिक सौंदर्य, ट्रेकिंग, जंगल सफारी और लोकल ट्राइबल कल्चर से जुड़े ये केंद्र पर्यटकों को यादगार अनुभव प्रदान कर रहे हैं.

पर्यटक मीना शाह ने कहा कि हम वडोदरा से भाट में इको-टूरिज्म देखने आए हैं. यहां का वातावरण बहुत अच्छा है. यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छी जगह है, जो नेचर के आसपास रहना पसंद करते हैं. पर्यटक प्रदीप शाह ने कहा कि मैं यहां पहली बार आया हूं, लेकिन यह देखकर बहुत खुश हूं कि यह जगह शहर के बहुत पास है. Government ने नेचर के पास रहने का मजा लेने वालों के लिए बहुत सारे इंतजाम किए हैं.

Government की नीतियों की वजह से डांग जिले में स्थित राज्य का एकमात्र सापुतारा हिल स्टेशन भी पर्यटन गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित फेस्टिवल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और टूरिज्म एक्टिविटीज के कारण यहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय होटल उद्योग, रेस्टोरेंट संचालकों, हस्तशिल्पियों और छोटे व्यापारियों को मिल रहा है.

सापुतारा के होटल एसोसिएशन के सेक्रेटरी तुकाराम कर्डीले ने कहा कि क्‍लाइमेट अच्‍छा है और बारिश शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्‍या में बढ़ोतरी हो सकती है. Gujarat Government और Gujarat टूरिज्‍म मानसून फेस्टिवल का आयोजन करती है. हर साल पर्यटकों की संख्‍या बढ़ रही है.

सापुतारा की स्‍थानीय महिला कारोबारी नीलाक्षी पटेल ने कहा कि यहां मौसम ठंडा और बादल वाला होता है, इसलिए यहां बहुत सारे टूरिस्ट आते हैं और बहुत भीड़ रहती है. यहां बहुत सारे फेस्टिवल भी होते हैं. सभी मौसमों में फेस्टिवल होते हैं. छोटे-बड़े व्यापारियों को भी रोजगार के बहुत सारे मौके मिलते हैं.

जंगलों के बीच इको-टूरिज्म, पहाड़ों पर टूरिज्म फेस्टिवल और अब समुद्र के तटों पर विकसित किए जा रहे नए-नए मरीन टूरिज्म प्रोजेक्ट Gujarat को देश के प्रमुख इको-मरीन टूरिज्म डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित कर रहे हैं. Government के इन प्रयासों से जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं लोकल इकोनॉमी, रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी खासा प्रोत्साहन मिल रहा है.

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एएसएच/एबीएम

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