
गुवाहाटी, 26 जनवरी . केंद्र Government ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें गुवाहाटी के नूरुद्दीन अहमद का भी नाम शामिल है. अपने क्षेत्र में वर्षों की मेहनत, समर्पण और निरंतर योगदान के जरिए राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले नूरुद्दीन अहमद को यह सम्मान मिलने से असम में खुशी की लहर है.
नूरुद्दीन अहमद ने समाचार एजेंसी से बातचीत में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहचान से वह बेहद खुश हैं. उन्होंने अपने सफर में सहयोग के लिए असम Government का धन्यवाद किया और बताया कि उनके काम के पीछे परिवार और टीम की बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने अपने जीवन दर्शन को साझा करते हुए कहा, “मैं धर्म में विश्वास नहीं करता, मेरे लिए काम ही धर्म है.”
नूरुद्दीन अहमद ने अपने परिवार की विविधता और एकता पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी हिंदू हैं, जिनका नाम जुनू राजखोवा है. उनके एक बेटे की शादी मणिपुरी युवती से हुई है, जबकि दूसरे बेटे की शादी तमिल युवती से हुई है. वहीं, उनकी बेटी की शादी अहोम समुदाय के युवक से हुई है. उन्होंने कहा कि उनके परिवार की यह विविधता इस बात का प्रतीक है कि प्यार, मेहनत और लगन किसी भी सीमा से ऊपर होती है.
उनकी पत्नी जुनू राजखोवा ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उनके पति की वर्षों की कड़ी मेहनत को आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. उन्होंने कहा, “अगर आप सच्ची लगन से कोशिश करते हैं तो आपको हीरे जरूर मिलते हैं,” और अपने पति के संघर्ष और निरंतर प्रयासों की सराहना की.
नूरुद्दीन अहमद की बेटी जेएन तूलिका ने भी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “उनकी बेटी होने के नाते मैं बेहद खुश हूं. मैं भगवान और असम के लोगों को धन्यवाद देती हूं, क्योंकि यह सम्मान हमारे लिए बहुत मायने रखता है.” उन्होंने India Government का भी आभार जताया और कहा कि उनके पिता हमेशा ‘काम ही धर्म है’ के सिद्धांत पर चलते रहे हैं. तूलिका ने कहा कि किसी भी काम को पूरे समर्पण से करने से न सिर्फ व्यक्ति, बल्कि समाज को भी लाभ होता है, और इसी वजह से उनके पिता इस सम्मान के सच्चे हकदार हैं.
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एएसएच/डीकेपी