
Kanpur, 10 फरवरी . उत्तर प्रदेश के Kanpur स्थित एचडीएफसी बैंक की एक शाखा में महिला कर्मचारियों के बीच हुई तीखी नोंकझोंक का वीडियो social media पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक महिला कर्मचारी यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि “मैं ठाकुर हूं.”
इस मामले में बैंक की एक कर्मचारी का पति शामिल था. अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बैंक की पूर्व कर्मचारी रितु त्रिपाठी और उनके पति ऋषि मिश्रा ने समाचार एजेंसी से बातचीत में अपनी-अपनी बातें सामने रखी हैं.
पूर्व बैंक कर्मचारी रितु त्रिपाठी ने बताया कि 6 जनवरी को वह अपना इस्तीफा देने के लिए सुबह करीब 9 बजे बैंक शाखा पहुंची थीं. उनका कहना है कि उस दिन उनका व्रत था और वह यह सोचकर गई थीं कि इस्तीफा देने के बाद दो से चार घंटे में वह घर लौट आएंगी, ताकि पूजा कर सकें. वह अपनी ननद के साथ बैंक पहुंची थीं. इसी दौरान उनकी ननद वॉशरूम जाने के लिए अंदर गईं, जहां आस्था नाम की कर्मचारी मौजूद थीं और दरवाजा लॉक नहीं था.
रितु के मुताबिक, यह एक छोटी सी बात थी, लेकिन इस पर आस्था नाराज हो गईं और उन्होंने गलती मानने से इनकार कर दिया. ननद के यह कहने पर कि दरवाजा लॉक कर लेना चाहिए था, आस्था भड़क गईं और उन्होंने अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया.
रितु त्रिपाठी का आरोप है कि इसके बाद आस्था ने पूरे दिन उनकी ननद को ताने मारे और कहा कि “ये मेरे लेवल की नहीं हैं, हम ऐसे लोगों से बात नहीं करते,” और यहां तक कहा कि उन्हें ब्रांच से बाहर निकाल दिया जाए. जब काफी देर तक मामला शांत नहीं हुआ तो रितु ने अपने पति को फोन कर बैंक बुला लिया. उनके पति ऋषि मिश्रा के आने के बाद उन्होंने अपनी बहन से पूरे मामले की जानकारी ली और एक अन्य कर्मचारी से भी घटना के बारे में पूछा. रितु के अनुसार, इसी दौरान आस्था वहां आईं और उनके पति के साथ गाली-गलौज करने लगीं और कथित तौर पर कहा, “मैं ठाकुर हूं, यहीं ठोंक दूंगी.”
रितु त्रिपाठी ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा, “ठाकुर होने का मतलब किसी को ठोंकना नहीं होता.” उन्होंने कहा कि उन्होंने कई ठाकुरों को देखा है जो पंडितों का सम्मान करते हैं और उन्हें आस्था का यह रवैया समझ में नहीं आया. रितु ने स्पष्ट किया कि वह जातिवाद नहीं करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने मौके पर यह नहीं कहा कि वह भी ब्राह्मण हैं और उन्हें इस पर गर्व है. उन्होंने कहा कि वह ब्राह्मण होने के नाते किसी भी तरह के शोषण को बर्दाश्त नहीं करेंगी.
वहीं, रितु त्रिपाठी के पति ऋषि मिश्रा ने कहा कि आरोप कोई भी किसी पर भी लगा सकता है, यहां तक कि Prime Minister और Chief Minister पर भी लोग आरोप लगाते हैं. उन्होंने बताया कि उस दिन सुबह उनकी पत्नी अपना इस्तीफा देने बैंक गई थीं और उन्होंने ब्रांच मैनेजर सुमित सिंह से इस्तीफा स्वीकार करने की बात कही थी. ऋषि मिश्रा का आरोप है कि बैंक में सुबह से ही उनकी पत्नी पर तंज कसे जा रहे थे और ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा था, जिन्हें सार्वजनिक रूप से दोहराया नहीं जा सकता. उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति मानसिक दबाव या शोषण की स्थिति में ही नौकरी छोड़ने का फैसला करता है.
ऋषि मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि शाम तक उनकी पत्नी को बैंक से जाने नहीं दिया गया और उन्हें बैठाकर रखा गया, जबकि उनका सारा काम पूरा हो चुका था. उन्होंने कहा कि उस समय शाखा में 14 अन्य ब्रांचों के हेड भी मौजूद थे. उन्होंने अपनी बहन से सिर्फ यह पूछने की गलती की कि आखिर मामला क्या था. ऋषि ने दावा किया कि उन्होंने न तो आस्था सिंह से कोई सीधी बातचीत की और न ही किसी की जाति पूछी. जाति का मुद्दा खुद आस्था सिंह ने उठाया और उन्होंने ही “मैं ठाकुर हूं” जैसी बात कही.
ऋषि मिश्रा ने यह भी कहा कि अगर अन्य कर्मचारी बीच में न आते तो वायरल वीडियो में दिख रहा लैपटॉप, जिसे आस्था फेंक रही थीं, उनके चेहरे पर लग सकता था. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी घटना के दौरान क्लस्टर हेड अपने केबिन में बैठे रहे और जब आस्था ने उनकी पूरी तरह से बेइज्जती कर ली, तब वह बाहर आए और धमकी भरे लहजे में कहा कि आगे से केवल स्टाफ ही आएगा, घरवाले नहीं.
दरअसल, यह घटना Kanpur में बैंक की पनकी शाखा में घटी. वायरल वीडियो में कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते और विवाद के दौरान जातिगत टिप्पणी करते हुए कर्मचारी को देखा जा सकता है, जिसकी पहचान आस्था सिंह के रूप में हुई है.
–
एएसएच/डीकेपी