
टोक्यो, 4 अगस्त . दक्षिण-पश्चिमी जापान के कुमामोटो प्रीफेक्चर में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप को एक हफ्ता बीत चुका है. बड़ी संख्या में लोग मारे गए और कुछ बेघर हो गए. राहत शिविरों में जिंदगी गुजारने को लोग मजबूर हैं. Tuesday को बहुत ज्यादा गर्मी के बीच पानी की सप्लाई भी बंद हो गई. 8,000 से अधिक लोग अभी भी इवैक्युएशन शेल्टर में हैं.
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, लोग 150 इवैक्युएशन शेल्टर में शरण ले रहे थे और भूकंप में लगभग 12,000 इमारतों को नुकसान होने का अनुमान है.
स्कूलों के जिम, सामुदायिक केंद्रों और कक्षाओं में बनाए गए राहत शिविरों को इवैक्युएशन शेल्टर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. इनमें से कई शिविरों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है. बड़ी संख्या में लोग अपनी कारों, पार्कों या क्षतिग्रस्त घरों के बाहर रात बिताने को विवश हैं. कथित तौर पर हीट स्ट्रोक से बचने के लिए कार में सो रहे एक शख्स की मौत भी हो गई.
क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, Monday को एक इवैक्युएशन शेल्टर के दौरे के बाद, Prime Minister सनाए ताकाइची ने कहा कि Government भूकंप को “अत्यधिक गंभीर आपदा” घोषित करेगी, जिससे स्थानीय Governmentों को निर्माण कार्य के लिए ज्यादा सब्सिडी मिल सकेगी, और वे पीड़ितों की मदद के लिए खास कदम उठा सकेंगे.
Tuesday को, ताकाइची की कैबिनेट ने भूकंप पीड़ित इलाके के लिए मदद के उपायों के लिए Government के रिजर्व फंड से लगभग 24.2 बिलियन येन (150 मिलियन डॉलर) इस्तेमाल करने की मंजूरी दी. Monday को प्रीफेक्चर के कई हिस्सों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा रहा, जबकि कुछ इलाकों में पहली बार रिकॉर्ड तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.
Prime Minister ताकाइची ने Monday को सेना के हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और उसके बाद क्षेत्र के सबसे बेहतर सुविधाओं वाले राहत शिविरों में से एक का दौरा किया था.
भूकंप पीड़ित क्षेत्रों में लोग अब भी अपने क्षतिग्रस्त घरों से मलबा, टूटे फर्नीचर और खराब घरेलू सामान हटाने में जुटे हैं. उकी और हिकावा कस्बों में विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी आवासों का निर्माण शुरू हो चुका है, जबकि कई होटल और पारंपरिक सराय भी प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए अपने कमरे उपलब्ध करा रहे हैं.
आपदा के कई दिन बाद भी 46,000 से अधिक घरों में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है. कई इलाकों में ईंधन की कमी भी बनी हुई है. दक्षिणी जापान में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से हीटस्ट्रोक का खतरा लगातार बढ़ रहा है.
कुमामोटो के गवर्नर ताकाशी किमुरा ने Prime Minister ताकाइची से मुलाकात के दौरान हाल के दिनों की “असामान्य गर्मी” पर विशेष चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कई राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है. गवर्नर ने केंद्र Government से अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि राहत शिविरों की स्थिति में जल्द सुधार किया जा सके.
Prime Minister ताकाइची ने गवर्नर को आश्वस्त करते हुए कहा, “Governor की मांगों को ध्यान में रखते हुए हम शीघ्रता से यह समीक्षा करेंगे कि आपदा प्रभावित क्षेत्र और वहां के लोगों के लिए Government क्या अतिरिक्त कदम उठा सकती है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्रवाई करेंगे.”
Government का कहना है कि उसकी प्राथमिकता जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करना, अस्थायी आवास तैयार करना, राहत शिविरों में चिकित्सा और स्वच्छता सुविधाएं बढ़ाना तथा भीषण गर्मी के बीच प्रभावित लोगों को सुरक्षित और बेहतर आश्रय उपलब्ध कराना है.
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केआर/