भोपाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई, पूर्व पीडब्लूडी इंजीनियर और परिवार की 67.25 करोड़ की संपत्ति कुर्क

Bhopal , 2 जून . Enforcement Directorate (ईडी) के Bhopal जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत Madhya Pradesh के लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिवार के सदस्यों की लगभग 67.25 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है.

ईडी ने विशेष Police स्थापना (एसपीई), लोकायुक्त, Bhopal द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) के साथ पठित धारा 13(2) के तहत गोविंद प्रसाद मेहरा के खिलाफ दर्ज First Information Report के आधार पर जांच शुरू की थी. यह First Information Report गोविंद प्रसाद मेहरा के पास उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति होने के आरोप में दर्ज की गई थी.

जांच में पता चला कि 4 मार्च 1985 से 29 फरवरी 2024 की अवधि के दौरान गोविंद प्रसाद मेहरा ने लोक निर्माण विभाग में सेवा करते हुए कथित तौर पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की. First Information Report के अनुसार, लगभग 4 करोड़ रुपए की वैध आय के मुकाबले कुल संपत्ति और खर्च 10 करोड़ रुपए से अधिक पाया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 6 करोड़ रुपए की संपत्ति तुलना में बहुत अधिक पाई गई है. यह उनकी ज्ञात वैध आय से लगभग 150 प्रतिशत अधिक है.

मूल एजेंसी द्वारा गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े परिसरों पर की गई तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण, चांदी की वस्तुएं और अन्य कीमती सामान बरामद और जब्त किए गए. जांच में गोविंद प्रसाद मेहरा से जुड़े विभिन्न परिसरों से 8.79 लाख रुपए की नकदी और लगभग 3.51 करोड़ रुपए मूल्य के सोने के आभूषण बरामद होने का खुलासा हुआ.

गोविंद प्रसाद मेहरा की ओर से इन संपत्तियों के अधिग्रहण के संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण निराधार पाए गए और उनका समर्थन करने वाला कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला. इसी को लेकर पीएमएलए के तहत आगे की जांच में पता चला कि गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिवार के सदस्यों ने नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील के सैनी गांव में लगभग 7,072 एकड़ भूमि पर फैले ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ को अधिग्रहित किया और उसे एक आलीशान फार्म-रिसॉर्ट के रूप में विकसित किया.

इस फार्म-रिसॉर्ट में कॉटेज, आवासीय इकाइयां, आंतरिक सड़कें, कृत्रिम जल निकाय, कृषि बुनियादी ढांचा और अन्य उच्च-मूल्य वाली सुविधाएं शामिल हैं. मूल्यांकन रिपोर्ट में इस संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग 49.44 करोड़ रुपए आंका गया है, जिसमें लगभग 16 करोड़ रुपए के निर्माण और विकास कार्य शामिल हैं.

वहीं, जांच में संपत्ति के अधिग्रहण और विकास के लिए इस्तेमाल किए गए फंड के स्रोत के बारे में दी गई सफाइयां असंबद्ध पाई गईं और उनके समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत नहीं मिला. पीएमएलए जांच के दौरान, 67.25 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति पाई गई और इस संबंध में जानकारी पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत एसपीई, लोकायुक्त के साथ साझा की जा रही है.

इन सभी सबूतों के आधार पर ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत 67.25 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है. कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय संपत्तियां, ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ नामक एक शानदार रिसॉर्ट-शैली की संपत्ति (जिसमें बड़े पैमाने पर विकसित भूमि, प्रीमियम कॉटेज, मनोरंजन सुविधाएं और संबंधित बुनियादी ढांचा शामिल है), नकद, सोने के आभूषण, चांदी की वस्तुएं और अन्य संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें अपराध से अर्जित संपत्ति और/या उसके मूल्य के रूप में पहचाना गया है. वहीं, ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है.

डीके/डीकेपी

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