ड्रोन भविष्य के युद्ध की दिशा तय करेंगे, समय के साथ चलना जरूरी : अमेरिकी सेना

वाशिंगटन, 16 मई . अमेरिकी सेना ने लॉमेकर्स को बताया है कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बिना इंसानी नियंत्रण वाले सिस्टम आधुनिक युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहे हैं. सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यूक्रेन युद्ध से यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में लड़ाइयों में सस्ते, बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जा सकने वाले और मानव रहित हथियारों की सबसे बड़ी भूमिका होगी.

अमेरिकी कांग्रेस की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने पेश होते हुए अमेरिकी सेना के सचिव डैनियल ड्रिस्कॉल ने कहा कि युद्ध का स्वरूप बहुत तेज गति से बदल रहा है और जो सेनाएं खुद को समय के हिसाब से नहीं बदलेंगी, वे पीछे छूट जाएंगी.

उन्होंने कहा, “ड्रोन इंसानों के बीच युद्ध करने के तरीके को पूरी तरह बदल रहे हैं. इतिहास में इतनी तेजी से बदलाव पहले कभी नहीं देखा गया. ये सस्ते होते हैं, जरूरत के हिसाब से बदले जा सकते हैं, बेहद सटीक होते हैं और कई तरह के काम कर सकते हैं.”

ड्रिस्कॉल ने बताया कि अमेरिकी सेना अब तेजी से ऐसे सिस्टम विकसित कर रही है जिनमें एआई, ऑटोमेटेड तकनीक और आधुनिक कमांड सिस्टम शामिल हों. खासतौर पर अमेरिका भविष्य में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संभावित संघर्षों को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है.

यह बयान अमेरिकी सेना के 2027 के बजट पर हुई एक तीखी सुनवाई के दौरान आया. इस दौरान दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि सस्ते ड्रोन अब निगरानी, दुश्मन को निशाना बनाने और बड़े हमलों में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं.

अमेरिकी सेना के जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने कहा कि सेना यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों से मिले अनुभवों के आधार पर अपनी ट्रेनिंग और युद्ध रणनीति तेजी से बदल रही है.

उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन और ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम से बहुत कुछ सीख रहे हैं. इन अनुभवों को अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से सेना की ट्रेनिंग और रणनीति में शामिल किया जा रहा है.”

अमेरिकी सेना ने “ऑपरेशन जेलब्रेक” नाम से एक बड़ा प्रोजेक्ट भी शुरू किया है. यह फोर्ट कार्सन में चल रहा है. यहां रक्षा कंपनियां और सेना के इंजीनियर मिलकर ऐसी सॉफ्टवेयर बाधाओं को हटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से अलग-अलग सैन्य सिस्टम आपस में युद्ध संबंधी जानकारी आसानी से साझा नहीं कर पाते.

ड्रिस्कॉल ने कहा कि अमेरिका के कई सैन्य सिस्टम अभी भी अलग-अलग बंद ढांचे की तरह काम करते हैं, जिससे जरूरी जानकारी तुरंत साझा करने में दिक्कत होती है. उन्होंने कहा, “जो भी सिस्टम कोई जानकारी तैयार करे, वह जानकारी अमेरिकी सेना तक कहीं भी तुरंत पहुंचनी चाहिए.”

सेना सचिव ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य के ड्रोन युद्धों में केवल इंसानी क्षमता काफी नहीं होगी. ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक हमलों का जवाब देने के लिए एआई की मदद जरूरी होगी. उन्होंने कहा, “अगर एक साथ बड़ी संख्या में ड्रोन हमला करें, तो इंसान अकेले इतनी तेजी से प्रतिक्रिया नहीं दे सकता.”

इस दौरान लॉमेकर्स ने यह सवाल भी उठाया कि क्या अमेरिकी सेना वास्तव में ड्रोन युद्ध को गंभीरता से ले रही है, क्योंकि छोटे ड्रोन खरीदने के लिए प्रस्तावित बजट पिछले वर्षों की तुलना में कम दिखाई दे रहा है. प्रतिनिधि यूजीन विंडमैन ने इस मुद्दे पर चिंता जताई.

इस पर ड्रिस्कॉल ने कहा कि अमेरिका की रणनीति अभी लाखों ड्रोन जमा करने की नहीं है. उसकी कोशिश ऐसा औद्योगिक ढांचा तैयार करने की है, जो युद्ध शुरू होते ही बहुत कम समय में बड़े पैमाने पर ड्रोन बना सके.

उन्होंने कहा, “यूक्रेन करीब 50 लाख ड्रोन बना रहा है और रूस भी लगभग उतने ही ड्रोन तैयार कर रहा है. अमेरिका अभी शांति के समय 50 लाख ड्रोन बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हमें बहुत तेजी से उस स्तर तक पहुंचने में सक्षम होना होगा.”

एएस/

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