महाराष्ट्र टेक्सटाइल सेक्टर में पीछे नहीं रहेगा : डिप्टी सीएम शिंदे

Mumbai , 19 अगस्त . Maharashtra के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे Wednesday को ‘फार्म टू फॉरेन’ कॉन्क्लेव में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के ‘विकसित India 2047’ के सपने को साकार करने के लिए राज्य Government ‘फाइव एफ’ विजन पर काम कर रही है. इसमें फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से फॉरेन तक का एक तय सफर शामिल है.

उन्होंने कहा कि हमारे खेतों में पैदा होने वाले कपास, रेशम, जूट और फलों की ग्लोबल ब्रांडिंग करना हमारा मकसद है.

डिप्टी सीएम ने कहा कि यह कॉन्क्लेव टेक्सटाइल सेक्टर के साथ-साथ किसानों, खासकर कपास उगाने वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. देश भर से कई उद्योगपति, वैज्ञानिक, व्यापारी और नीति-निर्माता इस कॉन्क्लेव में शामिल हुए हैं. वे अपने अनुभव और टेक्नोलॉजी साझा करेंगे, जिससे टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करने और किसानों को फायदा पहुंचाने में मदद मिलेगी. यह कॉन्क्लेव आत्मनिर्भर India की अहम पहल है.

उन्होंने कहा कि कपास से बने धागों से हम न सिर्फ कपड़े बुन रहे हैं, बल्कि एक विकसित India का भविष्य भी बुन रहे हैं. जल्द ही लंदन, न्यूयॉर्क और पेरिस के फैशन शो में ‘मेड इन Maharashtra’ का टैग देखने को मिलेगा. Maharashtra की मिट्टी में उगाई गई कपास और उससे बने उत्पाद अब सीधे विदेशों के मॉल में अपनी पहचान बनाएंगे. राज्य Government कपास उत्पादन से लेकर ग्लोबल फैशन मार्केट तक की चेन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, और ‘फार्म टू फॉरेन’ कॉन्सेप्ट के जरिए Maharashtra एक ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनेगा.

शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद मामले पर Supreme Court की सुनवाई पर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि कपिल सिब्बल बार-बार वही बात दोहरा रहे हैं. अगर आप ध्यान से देखें, तो जो बात उन्होंने दो साल पहले कही थी, वही बात वे आज भी कह रहे हैं. लेकिन, मैं बस इतना ही कहूंगा कि हमने एक संवैधानिक Government बनाई, लोगों ने उसका समर्थन किया और हमें Government बनाने के लिए एक बार फिर भारी बहुमत मिला. बस इतना ही काफी है. लोकतंत्र में बहुमत को अहमियत दी जाती है.

उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग विपक्ष के पक्ष में बात करता है, तो उन्हें यह अच्छा लगता है. लेकिन जब चुनाव आयोग उनके खिलाफ बात करता है, तो उन्हें यह गलत लगता है. विपक्ष में ऐसे लोग भी हैं, जो चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं और अदालतों को सलाह देने की कोशिश करते हैं. मैं उनके बारे में क्या कह सकता हूं.

डीकेएम/एबीएम

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