दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: संजय निरुपम का आप पर हमला, कहा- ईमानदारी का दावा बेनकाब

Mumbai , 19 अगस्त . शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कथित दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों की गिरफ्तारी, तमिलनाडु Government के तीसरे बच्चे के जन्म पर 365 दिन की मातृत्व छुट्टी देने के फैसले और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया, वहीं राहुल गांधी पर समाज के अलग-अलग वर्गों को भड़काकर राजनीति करने का आरोप लगाया.

सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों की गिरफ्तारी पर संजय निरुपम ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता कभी देश की जनता को ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का पाठ पढ़ाते थे. भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी ने Government बनाई थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. पार्टी के कई प्रमुख नेता भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों में जेल जा चुके हैं. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया खुद को कट्टर ईमानदार बताते रहे, लेकिन दोनों को जेल जाना पड़ा. अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई है.

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से आम आदमी पार्टी के उस Political दावे पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसके आधार पर उसने खुद को पारंपरिक राजनीति और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक विकल्प के तौर पर पेश किया था. पार्टी का पूरा Political ढांचा और उसके द्वारा किए गए ईमानदारी के दावे अब जनता के सामने बेनकाब हो चुके हैं. देश के मतदाताओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाले Political दलों और नेताओं को उनकी जवाबदेही के आधार पर परखा जाना चाहिए. स्थापित Political नेतृत्व को बदनाम करके खुद को ईमानदार और अलग विकल्प के तौर पर पेश करने वाली राजनीति से जनता को सावधान रहने की जरूरत है.

तमिलनाडु Government के तीसरे बच्चे के जन्म पर महिला को 365 दिन की मैटरनिटी लीव देने के फैसले पर भी निरुपम ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि India में जनसंख्या को लेकर परिस्थितियां पिछले कुछ दशकों में तेजी से बदली हैं. एक समय India के सामने तेजी से बढ़ती आबादी की समस्या थी. उस दौर में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कई योजनाएं और अभियान चलाए गए. लेकिन, अब देश के सामने एक नई चुनौती उभर रही है. जन्मदर में कमी और बुजुर्ग आबादी के बढ़ते अनुपात के कारण आने वाले वर्षों में India को एजिंग पॉपुलेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण India के राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में कम प्रजनन दर और बढ़ती उम्र की आबादी को लेकर चिंता बढ़ रही है. उन्होंने आंध्र प्रदेश के Chief Minister एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में की गई घोषणाओं का भी जिक्र किया. तमिलनाडु Government के इस फैसले को भी इसी बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. आने वाले समय में यह देश के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है.

उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तर India के राज्यों को भी प्रजनन दर से जुड़े बदलते रुझानों पर ध्यान देना चाहिए और ऐसी नीतियों पर विचार करना चाहिए, जिनसे देश भविष्य में जापान और चीन जैसे देशों की तरह तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की समस्या से न जूझे.

राहुल गांधी के हालिया बयानों पर संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को समाज के अलग-अलग वर्गों को मुद्दों के आधार पर लामबंद करने और भड़काने का एक Political फार्मूला मिल गया है. पहले युवाओं और छात्रों को लेकर राहुल गांधी ने Government के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की और अब वे ओबीसी समाज को लेकर बयान दे रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि देश का ओबीसी समाज केंद्र Government के खिलाफ क्यों जाएगा, जबकि Prime Minister Narendra Modi ओबीसी समाज से आते हैं और केंद्र Government की ओर से ओबीसी समुदाय के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं.

उन्होंने एनडीए शासित राज्यों में ओबीसी समाज से आने वाले मुख्यमंत्रियों का भी उल्लेख किया और बिहार व Madhya Pradesh जैसे राज्यों का उदाहरण दिया. निरुपम ने कहा कि ऐसे Political माहौल में राहुल गांधी द्वारा ओबीसी समाज की भावनाओं को भड़काने वाले बयान देना उचित नहीं है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का मौजूदा Political एजेंडा और उसकी Political रणनीति जनता द्वारा खारिज की जा चुकी है. अब समाज के अलग-अलग वर्गों को अलग-अलग मुद्दों पर उकसाकर Political लाभ हासिल करने की कोशिश की जा रही है.

संजय निरुपम ने कहा कि आने वाले समय में देश की जनता ऐसी राजनीति को समझेगी और यह पहचान करेगी कि कौन से नेता और Political दल वास्तव में जनता के मुद्दों पर काम कर रहे हैं और कौन केवल Political लाभ के लिए सामाजिक वर्गों के बीच असंतोष पैदा करने की कोशिश कर रहा है.

पीएसके

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